
Chhattisgarh बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में लगभग 15 साल की सेवा के बाद नौकरी से बाहर किए गए सब इंजीनियरों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। कोर्ट ने उनकी नियुक्ति निरस्त करने के हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले में सरकार से जवाब तलब किया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से सब इंजीनियरों को फौरी राहत मिल गई है।
4 फरवरी को आया था हाईकोर्ट का फैसला
बिलासपुर हाईकोर्ट ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत 2011 में हुई भर्ती में 66 इंजीनियरों की नियुक्ति को अवैध घोषित कर दिया था। 2011 में 275 इंजीनियरों की भर्ती हुई थी। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ में हुई थी। कोर्ट ने 4 फरवरी को दिए अपने फैसले में इन नियुक्तियों को निरस्त करने का आदेश दिया था।
इस आधार पर नियुक्ति की गई निरस्त
इन नियुक्तियों के खिलाफ दायर याचिका में कट ऑफ तारीख के बाद डिप्लोमा व डिग्री प्राप्त करने को आधार बनाया गया था। इसके साथ ही 275 पदों के लिए विज्ञापन जारी कर 383 पदों पर भर्ती की गई थी। हाईकोर्ट ने साहनुभूति की गुहार भी ठुकरा दी थी।
सरकार से लगाई थी गुहार
सेवा से बाहर किए गए सब इंजीनियरों ने सरकार से गुहार लगाई थी। इंजीनियरों ने मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री को पत्र लिखा था। इंजीनियरों का कहना था कि अब उम्र की वजह से अब उन्हें दूसरी नौकरी भी नहीं मिलेगी। परिवार के सामने संकट आ जाएगा। इससे देखते हुए सरकार से सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का आग्रह किया था। इस खबर को डिटेल में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
सुप्रीम कोर्ट से राहत
हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई, जहां कोर्ट ने प्रारंभिक तौर पर नियुक्ति निरस्त करने के हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दिया है। कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार से जवाब मांगा है। इसके बाद आगे की सुनवाई होगी।




