रायपुर (Chaturpost): छत्तीसगढ़ शासन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ Zero Tolerance (जीरो टॉलरेंस) की नीति अपनाते हुए नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के दो बड़े अधिकारियों पर गाज गिराई है। राजनांदगांव की एक निजी कॉलोनी के नक्शे में हेर-फेर कर सरकार को करोड़ों रुपये की चपत लगाने के मामले में संयुक्त संचालक और उप संचालक को तत्काल प्रभाव से Suspend (निलंबित) कर दिया गया है।
क्या है पूरा मामला? (The Scam)
राजनांदगांव नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत ‘सत्यम परिवेश’ (परिवेश आई.एन.सी.) नामक कॉलोनी के ले-आउट अनुमोदन (Layout Approval) में भारी गड़बड़ी पाई गई थी। जांच में सामने आया कि अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए नियमों को ताक पर रखकर अभिन्यास में बदलाव किए, जिससे शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि हुई।
इन अधिकारियों पर हुई कार्रवाई
जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर राज्य शासन ने निम्नलिखित अधिकारियों को दोषी पाते हुए कार्रवाई की है:
- सूर्यभान सिंह ठाकुर: संयुक्त संचालक, क्षेत्रीय कार्यालय, दुर्ग।
- कमला सिंह: उप संचालक, क्षेत्रीय कार्यालय, राजनांदगांव।
कार्रवाई की मुख्य बातें (Key Highlights)
- Investigation: संचालनालय द्वारा गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में दोनों अधिकारियों को प्रथम दृष्टया कदाचार का दोषी पाया।
- Service Rules: अधिकारियों के खिलाफ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के तहत एक्शन लिया गया है।
- Headquarters Change: निलंबन की अवधि (Suspension Period) के दौरान दोनों का मुख्यालय नवा रायपुर स्थित इंद्रावती भवन निर्धारित किया गया है।
- Restrictions: ये अधिकारी बिना अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे, हालांकि नियमानुसार इन्हें जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।
पारदर्शिता पर जोर
आवास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा जारी इस आदेश से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि Infrastructure (बुनियादी ढांचे) और टाउन प्लानिंग से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता (Financial Irregularity) बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की Legal Action (कानूनी कार्रवाई) से निजी कॉलोनाइजर्स और अधिकारियों के बीच होने वाले गठजोड़ पर लगाम लगेगी और सरकारी खजाने की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

