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सिर्फ जल-जंगल-जमीन ही नहीं, अब ‘बस्तर से सरगुजा’ तक की लोक धुनों का भी होगा अपना ‘कॉपीराइट’!

Tribal Digital Rights

नवा रायपुर । छत्तीसगढ़ सरकार अब जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा के साथ-साथ जनजातीय संस्कृति को डिजिटल कवच (Digital Shield) पहनाने की तैयारी में है। प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने संकेत दिए हैं कि राज्य की पारंपरिक लोक धुनों और वाद्य यंत्रों को चोरी होने से बचाने के लिए सरकार उनकी डिजिटल ब्रांडिंग और कॉपीराइट (Copyright) कराएगी।

यह खबर इसलिए खास है क्योंकि पहली बार सरकार ‘कॉमन्स’ (साझा संसाधनों) के साथ-साथ सांस्कृतिक ज्ञान को भी कानूनी सुरक्षा देने की दिशा में बढ़ रही है।

स्पेशल स्टूडियो

अब तक आदिवासियों के लोक गीत और संगीत को कोई भी इस्तेमाल कर लेता था, लेकिन (However) अब एक स्पेशल स्टूडियो के जरिए इनका दस्तावेज़ीकरण (Documentation) होगा।

मुख्यमंत्री संभालेंगे कमान: PESA और FRA का होगा मिलन

अक्सर देखा जाता है कि पेसा (PESA) और वन अधिकार अधिनियम (FRA) के बीच तकनीकी उलझनों की वजह से काम अटकते हैं। अंततः (Finally), इस समस्या को खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक हाई-प्रोफाइल टास्क फोर्स (Task Force) का गठन किया जा रहा है।

70 लाख एकड़ जमीन: सरकार नहीं, ‘समुदाय’ बनेगा मालिक

प्रमुख सचिव ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ की लगभग 70 लाख एकड़ जमीन, जो ‘कॉमन्स’ श्रेणी में आती है, उसकी सुरक्षा का मॉडल ‘न्यूनतम सरकार’ पर आधारित होगा।

खबर के मुख्य बिन्दु (Bullet Points)

विशेषज्ञ की राय

जानकारों का मानना है कि Tribal Digital Rights की दिशा में छत्तीसगढ़ का यह कदम देश के अन्य राज्यों के लिए एक बेंचमार्क (Benchmark) साबित होगा। यह न केवल संस्कृति को बचाएगा, बल्कि जनजातीय युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए प्रेरित (Motivate) भी करेगा।

PESA vs FRA: समझिए क्या है ये और क्यों है इनका समन्वय जरूरी?

छत्तीसगढ़ में जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों के हक को मजबूत करने के लिए दो प्रमुख कानून काम करते हैं। हालांकि (However), अक्सर इनके बीच तालमेल की कमी से जमीनी स्तर पर काम अटक जाते हैं, जिसे अब मुख्यमंत्री की टास्क फोर्स सुलझाएगी।

1. पेसा अधिनियम, 1996 (PESA Act)

2. वन अधिकार अधिनियम, 2006 (FRA – Forest Rights Act)

समन्वय (Coordination) क्यों है जरूरी?

वर्तमान में स्थिति यह है कि कई बार FRA के तहत पट्टे मिल जाते हैं, लेकिन PESA के तहत ग्राम सभा के पास उन्हें प्रबंधित करने के अधिकार स्पष्ट नहीं होते।

आसान भाषा में समझें: PESA और FRA

PESA: गांव की सरकार (ग्राम सभा) को ताकतवर बनाने वाला कानून।

FRA: जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों को मालिकाना हक (पट्टा) देने वाला कानून।

टास्क फोर्स इन दोनों के बीच की कड़ियों को जोड़कर आदिवासियों के अधिकारों को और मजबूत करेगी।

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