Chhattisgarh Vananchal Electrification रायपुर। छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचल (Forest areas) क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। जिन गांवों में अब तक केवल सोलर ऊर्जा (Solar Energy) के भरोसे बिजली की व्यवस्था थी, उन्हें अब जल्द ही मुख्य बिजली लाइन (Grid) से जोड़ा जाएगा। इससे ग्रामीणों को अस्थायी व्यवस्था से मुक्ति मिलेगी और नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
एमडी ने किया कोटा के गांवों का दौरा
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (CSPDCL) के प्रबंध निदेशक (Managing Director) भीम सिंह कंवर ने हाल ही में अधिकारियों की टीम के साथ बिलासपुर के कोटा वनांचल का दौरा किया। उन्होंने वहां चार प्रमुख गांवों—सरगोड़, छुइहया, चिचवा डबरी और परसापानी का स्थल निरीक्षण (Site Inspection) किया।
स्थायी उजाले के लिए कार्य योजना
निरीक्षण के दौरान एमडी ने कार्य की प्रगति (Progress of work) का आकलन किया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इन गांवों को मुख्य ग्रिड से जोड़ने के लिए जल्द से जल्द ठोस कार्य योजना (Action Plan) तैयार की जाए। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद अब विभाग ने यहां बिजली पहुंचाने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
फॉरेस्ट क्लीयरेंस के लिए निर्देश
चूंकि ये गांव घने जंगलों के बीच बसे हैं, इसलिए बिजली लाइन बिछाने के लिए वन विभाग की अनुमति (Forest Clearance) अनिवार्य है। एमडी भीम सिंह कंवर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वन विभाग के साथ तत्काल समन्वय (Coordination) स्थापित कर क्लीयरेंस प्राप्त करें, ताकि विद्युतीकरण (Electrification) के काम में कोई बाधा न आए।
ग्रामीणों में खुशी की लहर
मुख्य बिजली लाइन पहुंचने की खबर से ग्रामीणों में भारी उत्साह है। अब वे सीमित सोलर बिजली पर निर्भर रहने के बजाय पंखा, टीवी और मोटर जैसे बिजली के उपकरणों (Appliances) का आसानी से उपयोग कर सकेंगे। ग्रिड की बिजली पहुंचने से क्षेत्र में विकास की रफ्तार (Speed of development) भी तेज होगी।
अधिकारियों की उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण निरीक्षण के दौरान मुख्य रूप से बिजली कंपनी के अधीक्षण अभियंता (Superintending Engineer) एस. के. जांगड़े, ईई प्रोजेक्ट मिलिंद पाण्डेय, कोटा ईई राजेन्द्र गोंड सहित अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
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