
CSPC रायपुर। छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली कंपनियों में एक तरफ कर्मचारी पदोन्नति का इंतजार करते-करते रिटायर हो रहे हैं, दूसरी तरफ अफसरों को प्रमोट करने के लिए नए-नए पद स्वीकृत किए जा रहे हैं। इस चक्कर में कई गैर जरुरी पद भी बना दिए जा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है। तीन कंपनियों के तीन विभागों में छह बॉस बना दिए गए हैं।
बोर्ड की 118वीं बैठक में स्वीकृत हुआ नया पद
होल्डिंग कंपनी की जिम्मेदारी संभल रही ट्रांसमिशन कंपनी के बोर्ड (BOD) की 118वीं बैठक में एक नए पद को मंजूरी दी गई। बोर्ड की यह बैठक 27 जून 2025 को हुई थी। इस बैठक में अकाउंट (Account) दो नए पदों को मंजूरी दी गई। इसमें एक महाप्रबंधक यानी जनरल मैनेजर (GM) और दूसरा एडिशनल जनरल मैनेजर का पद शामिल है।
छह अगस्त को जारी हुआ पद स्वीकृति का आदेश
बिजली ट्रांसमिशन कंपनी के बोर्ड की 27 जून को हुई बैठक में लिए गए निर्णय के आधार पर कंपनी के चीफ इंजीनियर (HR) ने इसी महीने छह तारीख को दोनों पदों की स्वीकृति का आदेश जारी कर दिया है। यानी अब इन दोनों पदों पर नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।
CSPC ईडी हैं अकाउंट विभाग के चीफ
तीनों बिजली कंपनियों के अकाउंट विभाग के चीफ कार्यपालक निदेशक (ED) रैंक के अफसर हैं। इनमें संदीप मोदी जनरेशन कंपनी, एमएस चौहान ट्रांसमिशन कंपनी और आलोक सिंह डिस्ट्रीब्यूशन के कार्यपालक निदेशक हैं। दो बिजली कंपनियों में ईडी के नीचे जीएम हैं इनमें वायबी जैन डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी और नंदिनी भट्टाचार्य जनरेशन कंपनी शामिल हैं। तीसरे जीएम का पद ट्रांसमिशन कंपनी के लिए मंजूर किया गया है।
अकाउंट जैसे विभाग में दो-दो बॉस
अफसरों के गैर जरुरी नए पद स्वीकृत किए जाने से कर्मचारियों में नाराजगी है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि ईडी और जीएम दोनों बड़ा रैंक है। अकाउंट जैसे विभाग में इतने बड़े-बड़े रैंक के दो-दो पदों की जरुरत ही नहीं है। बोर्ड के समय में यही काम एक अफसर अकेले संभालते थे।
अफसरों को उपकृत करने का खेल
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि यह सब कुछ अफसरों को उपकृत करने का खेल है। कंपनी में अफसरों को प्रमोट करने के लिए नए-नए पद बनाए जा रहे हैं। इससे अफसरों को तो फायदा हो रहा है, लेकिन जनता का नुकसान हो रहा है। कंपनी में स्वीकृत किए जा रहे हर एक पद का आर्थिक भार अंतत: उपभोक्ता पर पड़ता है। इसे विद्युत नियामक आयोग को संज्ञान में लेना चाहिए।
CSPC इधर, प्रमोशन का इंतजार करते-करते…
बिजली कंपनियों में एक तरफ अफसरों को प्रमोट करने के लिए नए- नए पद स्वीकृत किए जा रहे हैं, दूसरी तरफ कर्मचारी पदोन्नति का इंतजार करते-करते सेवानिवृत्त हो जा रहे हैं। उन्हें सेवानिवृत्ति के दिन एक साथ दो-दो प्रमोशन दे कर खानापूर्ति की जा रही है।
पदोन्नति में हाईकोर्ट के आदेश पर अमल नहीं
बिजली कंपनियों में अफसरों और कर्मचारियों की पदोन्नति में बड़ा पेंच फंसा हुआ है। कोर्ट केस की वजह से सैकड़ों अधिकारी और कर्मचारी बिना प्रमोशन के लिए सेवानिवृत्त हो गए, लेकिन अब हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद उस पर हमल नहीं किया जा रहा है। कोर्ट ने पदोन्न्ति में आरक्षण को गलत बताते हुए नए सिरे से पदोन्नति आदेश जारी किया है।
इस वजह से नहीं हो पा रहा हाईकोर्ट के आदेश का पालन
पदोन्न्ति को लेकर हाईकोर्ट की तरफ से दिए गए आदेश का पालन को कंपनी की तरफ से लगातार टाला जा रहा है। बताया जा रहा है कि हाईकोर्ट के आदेश का पालन किए जाने की स्थिति में आरक्षण की वजह से बड़े पदों पर पहुंच चुके कई अफसर डिमोट हो जाएंगे। हाईकोर्ट के पदोन्नति के आदेश का पालन नहीं किए जाने की सबसे बड़ी वजह यही है।
जानकारों का कहना है कि चूंकि यह हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना की श्रेणी में आता है। ऐसे में पदोन्नति न मिलने से नाराज होकर कोई अफसर हाईकोर्ट न चला जाए, इसी डर से अफसरों के लिए नए- नए पद स्वीकृत किए जा रहे हैं।





