CSPC रायपुर। छत्तीसगढ़ की सरकारी विद्युत कंपनियों में प्रमोशन का इंतजार करते-करते सेवानिवृत्ति की दहलीज पर पहुंच चुके कर्मचारियों को प्रबंधन ने झटका दे दिया है। कंपनी ने सेवानिवृत्ति के तीन महीने पहले प्रमोशन देने के अपने ही आदेश को निरस्तर कर दिया है।
इस खबर को समझने के लिए पहले यह जान लें कि यह पूरा मामला है क्या। दरअसल, कंपनी में आरक्षण के आधार पर हो रहे प्रमोशन को हाईकोर्ट ने गलत करार दे दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि आरक्षण के आधार जारी किए गए पदोन्नति के सभी आदेश निरस्त कर, नए सिरे से प्रमोशन आर्डर जारी किया जाए।
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि प्रमोशन को लेकर हाईकोर्ट का आदेश एकदम स्पष्ट है, लेकिन कंपनी प्रबंधन उसका पालन करने की बजाए बाइपास करने के रास्ते तलाश रहा है। इसी चक्कर में सुझाव देने के लिए एक कमेटी बनाई गई, लेकिन कमेटी आज तक रिपोर्ट नहीं दे पाई है।
हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं करने के कारण कंपनी के कर्मचारी अब भी प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे दर्जनों कर्मचारी बिना प्रमोशन के ही सेवानिवृत्त हो रहे हैं। ऐसे में कर्मचारी संगठनों ने जब प्रमोशन का दबाव बनाया तो कंपनी प्रबंधन ने फिर एक बीच का रास्ता निकाल लिया।
प्रबंधन ने 23 जुलाई 2025 को एक आदेश जारी किया था। इसमें कहा गया था कि ऐसे इंजीनियर और कर्मचारी जो सेवानिवृत्त होने वाले हैं और उनका प्रमोश ड्यू है, उन्हें सेवानिवृत्ति के तीन महीने पहले प्रमोट कर दिया जाएगा। अब इसी आदेश को निरस्त कर दिया गया है।
कंपनी प्रबंधन की तरफ से 30 सितंबर को एक लाइन का आदेश जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि 23 जुलाई 2025 को जारी आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है। यानी अब दर्जनों कर्मचारियों को बिना प्रमोशन के ही सेवानिवृत्त होना पड़ेगा।
हाल ही में विद्युत कंपनी के एक ऐसा मामला सामने आया जिसमें सेवानिवृत्त होने के कुछ घंटे पहले एक साथ दो-दो प्रमोशन दे दिया गया।
प्रमोशन को लेकर हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने की स्थिति में कई लोगों को डिमोट करना पड़ेगा। इसमें टॉप लेवल पर बैठे अफसर भी प्रभावित होंगे। माना जा रहा है कि इसी कारण हाईकोर्ट के आदेश के पालन नहीं हो रहा है।
अभियंता कल्याण संघ के प्रांताध्यक्ष इंजीनियर एनआर छीपा का कहना है कि प्रमोशन को लेकर हाईकोर्ट का आदेश एकदम स्पष्ट है, लेकिन कंपनी प्रबंधन उसका पालन करने की बजाय समीक्षा कर रहा है। यह कंपनी के सैकड़ों कर्मचारियों के साथ न केवल अन्याय है बल्कि हाईकोर्ट की अवमानना भी है।