CSPDCL रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी में कमीशनखोरी का मामला सामने आया है। अफसरों ने कमीशन के चक्कर में न केवल बिना टेंडर के ही काम कराया, बल्कि काम की लागत भी बढ़ा दी। शिकायत के बाद मामले की जांच हुई, जिसमें आरोप सही पाए गए हैं। इसके बाद भी जिम्मेदारों पर कार्यवाही नहीं हो रही है।
रायपुर में वितरण कंपनी में कमीशनखोरी के खेल का खुलास हुआ है। बैरन बाजार स्थित एक भवन के घरेलू बिजली कनेक्शन का स्वीकृत भार 16 किलोवाट से बढ़ाकर 23 किलोवाट किया गया। इसके लिए लगे 63 केवीए ट्रांसफार्मर को 100 केवीए में अपग्रेड किया गया। इस काम के लिए वर्क आर्डर 23 जून 2025 को जारी कर दिया गया था, जबकि टेंडर 25 जून 2025 और बिड की अंतिम तिथि 15 जुलाई 2025 थी। इस तरह टेंडर की पूरी प्रक्रिया कागजों में हो गई।
इस मामले की जांच रिपोर्ट में भी यह खुलासा हुआ है कि निविदा जारी होने से पहले ही ट्रांसफार्मर लगाने का काम हो चुका था। जांच रिपोर्ट के अनुसार ऐसे 45 लाख से ज्यादा के 5 काम नियम ताक पर रखकर बिना टेंडर कराए गए हैं। हर काम को डेढ़ से दो लाख रुपए लागत बढ़ाकर कराया गया है। इन सभी मामलों में जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र जारी किए जा चुके हैं।
रुद्रा इंटरप्राइजेस कबीर नगर, को 5 लाख 32 हजार का काम दिया गया, जबकि यही काम दूसरी कंपनी 4 लाख 26 हजार में करने को तैयार थी।
वेदांत पावर मोवा को जो काम 10 लाख 30 हजार कराया गया, वहीं काम दूसरी कंपनी 7 लाख 75 हजार में करने को तैयार थी, लेकिन उन्हें बिना किसी लीगल कारण के टेंडर प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया।
वेदांत पावर से एलटी पोल का काम 12 लाख 67 हजार में कराया गया है। यही काम दूसरी कंपनी 11 लाख 71 हजार में करने को तैयार थी। बिना किसी लीगल कारण के इन्हें भी टेंडर प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया था।
ट्रांसफार्मर लगाने का काम कार्यपालन यंत्री की देखरेख में होना बताया जा रहा है। जांच रिपोर्ट के अनुसार कार्यपालन यंत्री ने पूरा काम अधीक्षण यंत्री एम विश्वकर्मा के मौखिक निर्देश के बाद कराया था। जांच अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया है कि निविदा जारी होने से पहले ही ट्रांसफार्मर अपग्रेडेशन का काम जमीनी स्तर पर पूरा कर लिया गया था।
कंपनी के सूत्रों के अनुसार मामले की जांच रिपोर्ट आए करीब आठ महीने हो गए हैं, इस दौरान आरोप पत्र जारी करने के अतिरिक्त कोई कार्यवाही नहीं की गई है। ऐसे में अब प्रबंधन पर दोषियों को बचाने के आरोप लग रहे हैं।