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CSPDCL भड़के विद्युत कर्मचारी: कंपनी के इस फरमान को बताया बेतुका और तानाशाही, पूछा- कैसे बदल सकते हैं सेवा शर्तें

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CSPDCL रायपुर। छत्‍तीसगढ़ की विद्युत वितरण कंपनी के एक आदेश को लेकर कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ने लगी है। कंपनी के इस आदेश पर कर्मचारी संगठनों बेतुका और तानाशाही पूर्ण करार दिया है। कर्मचारी नेताओं ने उल्‍टे कंपनी प्रबंधन से ही तीखा सवाल पूछा है।

यह है मामला

पूरा मामला प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत सोलर प्‍लांट लगाने का है। वितरण कंपनी ने दो दिन पहले एक आदेश जारी किया है। इसमें सोलर प्‍लांट नहीं लगाने वाले बिजली कर्मियों को बिजली बिल पर मिलने वाली विशेष छूट को समाप्‍त करने की धमकी दी गई है। इस पर कर्मचारी संगठनों ने सवाल खड़ा किया है।

आदेश को बताया अवैधानिक

कर्मचारी नेताओं ने कहा कि किसी कंपनी को यह अधिकार नहीं है कि वह कर्मचारियों अधिकारियों को मिल रही सुविधा बंद कर दे। केंद्र सरकार या राज्य सरकार का ऐसा कोई आदेश नहीं है जिसमें कर्मचारियों को सोलर लगाना अनिवार्य हो । यह आदेश पूरी तरह अवैधानिक है ।

केवल वितरण कंपनी ने ही जारी किया है आदेश

कर्मचारी नेताओं ने पूछा है कि तीन कंपनियों में केवल डिस्ट्रीब्यूशन ने ऐसा आदेश किस आधार पर जारी किया है यह बताए। डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी अपने लगभग 3000 कंपनी क्वार्टर और सेवा भवन सहित लगभग 500 से भी अधिक कार्यालयों में लगाने की कोई योजना नहीं बनाई है और कर्मचारियों को धमकी देना पूरी तरह अनुचित है ।

सुविधा बंद करने का एकपक्षीय फैसला नहीं ले सकती है कंपनी

महासंघ के अरुण देवांगन ने बताया कि विद्युत अधिनियम की धारा 133 के प्रावधानों के तहत किसी भी सुविधा को एकपक्षीय बंद नहीं कर सकती । कर्मचारी नेताओं के अनुसार विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 133 के अनुसार, केंद्र सरकार या राज्य

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सरकार के तहत काम करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के लिए, जब तक कि सेवा शर्तों में बदलाव नहीं होता। उनकी सुविधाएं या वेतन कम नहीं किया जा सकता है। इसका अर्थ है कि कर्मचारियों की सुविधाओं में कमी नहीं की जा सकती, बशर्ते कि वह कानून के तहत तय की गई शर्तों के अनुसार हो।

विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 133 के बारे में अधिक जानकारी

यह धारा केंद्र सरकार या राज्य सरकार के तहत काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों से संबंधित है। यह सुनिश्चित करती है कि कर्मचारियों की मौजूदा सुविधाओं में कोई कमी न हो।

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यह धारा सेवा शर्तों के अनुसार कर्मचारियों के वेतन और भत्तों की सुरक्षा करती है। इसलिए डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी का रवैया पूरी तरह तानाशाही भरा बेतुका निर्णय है

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कर्मचारी नेताओं ने कहा कि ध्यान रहे कि विद्युत कंपनी के लगभग 1000 से अधिक कार्यालयों में उपयोग किया जा रहा अनाप शनाप बिजली खपत एडजस्टमेंट होने से जनता पर ही लोड जाता है।

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