CSPDCL रायपुर। छत्तीसगढ़ बिजली वितरण कंपनी में 33/11 केवी के सब स्टेशनों के टेंडर को लेकर विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। पहले ही विवादों की वजह से टेंडर लेट हुआ है, अब कंपनी प्रबंधन पर ही ठेकेदारों की सुविधा के अनुसार नियम बदलने जैसे गंभीर आरोप लग रहे हैं।
बताया जा रहा है कि सब स्टेशनों के लिए वर्क आर्डर इसी महीने जारी करने की तैयारी है, लेकिन अब तक कई ठेकेदारों ने लेबर लाइसेंस नहीं दिया है। आरोप यह भी है कि वर्कऑर्डर तो तीन साल का दिया जा रहा है लेकिन बैंक गारंटी एक साल की ही मांगी जा रही है। टेंडर के नियम ठेकेदारों के हिसाब से बनाए जा रहे हैं। ठेकेदारों को प्रति सब स्टेशन कई गुना लाभ पहुंचाया जा रहा है, जबकि कर्मचारियों की सुविधाओं की अनदेखी की जा रही है।
छत्तीसगढ़ में 33/11 केवी के लगभग 1500 सब स्टेशन हैं। इन सब स्टेशनों के माध्यम से घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली पहुंचाई जाती है। सब स्टेशनों के मेंटनेंस का कार्य आउटसोर्सिंग पर दिया जाता है। सब स्टेशनों के रखरखाव के लिए कंपनी प्रबंधन द्वारा टेंडर निकाला गया है। 5 माह बाद भी अब तक टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।
टेंडर में 25 से अधिक फर्मों ने भाग लिया था। इनमें से 23 फर्मे पात्र हुईं। टेंडर में जमकर मनमानी के आरोप लग रहे हैं। कंपनी ठेकेदारों पर पूरा मेहरबान है। उनके अनुसार ही टेंडर की शर्तें तय हो रही है। कइयों के पास तो लेबर लाइसेंस नहीं है फिर भी उन्हें वर्कऑर्डर जारी करने की तैयारी चल रही है।
नियमानुसार लेबर लाइसेंस होने पर ही टेंडर में भाग लेने की शर्त होनी चाहिए। सब स्टेशनों के लिए 11 नवंबर को लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया गया था। 30 दिन के भीतर समस्त प्रक्रियाएं पूरी होनी चाहिए परंतु कई ठेकेदारों ने न लेबर जमा किया है और न ही लीगल विभाग से दस्तावेजों का परीक्षण उपरांत अनुमोदन प्राप्त हुआ है।
बताया जा रहा है कि एल वन वाली एजेंसी लीगल विभाग से अनुमोदन की प्रक्रिया भी अधूरी है। लेबर लाइसेंस का परीक्षण भी नहीं हो पाया है। बताया जा रहा है कि फमों को तीन साल का वर्कऑर्डर जारी किया जा रहा है जबकि बैंक गारंटी एक साल की ही ली जा रही है। कईयों के पास मेडिकल इंश्योरेंस भी नहीं है। टेंडर 36 माह के लिए है और इसमें 12 माह का एक्सटेंशन दिया गया है अर्थात 48 माह का संचालन ठेकेदार करेंगे।
1 जनवरी से नए ठेकेदारों को सब स्टेशन सौंपने की तैयारी चल रही है है परंतु टेंडर प्रक्रिया को लेकर विवाद चल रहा है। आमतौर पर ठेकेदारों को अधिकतम 6 माह का ही एक्सटेंशन मिलता था लेकिन इस बार इसे एक साल कर दिया गया है।
ठेकेदारों को पहले प्रति सब स्टेशन 500 रूपए लाभ मिलता था लेकिन कंपनी प्रबंधन ने 4 गुना बढ़ा दिया है। इससे कंपनी को करोड़ों रूपए का नुकसान होगा। ठेकेदारों को तो पूरा लाभ दिया जा रहा जबकि कर्मचारियों की सुविधाओं में कटौती की जा रही है। उन्हें राष्ट्रीय पर्व पर मिलने वाली छुट्टी में भी कटौती कर दी गई है।
इतना ही नहीं श्रम नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। नियमतः टेंडर के लिए ठेकेदारों के पास बैंक गारंटी, लेबर लाइसेंस, ए क्लास कान्ट्रेक्टर, मेडिकल इंश्योरेंस और एग्रीमेंट देना होता है परंतु आधे अधूरे दस्तावेज के साथ टेंडर स्वीकार किए गए हैं। माना जा रहा है कि कंपनी प्रबंधन ठेकेदारों के दबाव में है।