CSPDCL रायपुर। छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली वितरण कंपनी में चीफ इंजीनियर (प्रोजेक्ट) के अधीन अधीक्षण अभियंता (Superintending Engineer) सर्किल का गठन किया गया है। पूरे प्रदेश को तीन सर्किल में बांटा गया है। इन एसई इस सर्किल कार्यालयों के चीफ होंगे।
कंपनी की तरफ से प्रोजेक्ट में तीन एसई सर्किल के गठन का आर्डर जारी कर दिया गया है। 4 सितंबर 2025 को जारी इस आर्डर में बताया गया है कि एसई सर्किल के गठन का फैसला कंपनी के बोर्ड ऑफ डॉयरेक्टर्स (बीओडी) की 137वीं बैठक में लिया गया था। यह बैठक 12 अगस्त 2025 को हुई थी।
वितरण कंपनी में इससे पहले 2016 में बदलाव किया गया था। पहले चीफ इंजीनियर एसटीआरई के जरिये प्रोजेक्ट के काम होते थे। एसटीआरई में भी पूरे राज्य को तीन सर्किल में बांटा गया था। 2016 में चीफ इंजीनियर एसटीआरई के स्थान पर चीफ इंजीनियर प्रोजेक्ट बना दिया गया।
चीफ इंजीनियर प्रोजेक्ट के गठन के साथ कंपनी के बोर्ड ने चीफ इंजीनयर प्रोजेक्ट के कार्यालय के अधीन प्रदेश में 12 ईई कार्यालयों का भी गठन किया। इसके साथ धमतरी, कोरबा, जांजगीर और महासमुंद में चार प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग सेल का गठन किया गया।
12 अगस्त 2025 को बोर्ड की बैठक में लिए गए निर्णय के आधार पर कंपनी ने तीन एसई सर्किल के गठन का आर्डर जारी किया है। ये तीन सर्किल रायपुर, बिलासपुर और जगदलपुर है।
एसई रायपुर सर्किल में रायपुर शहर और ग्रामीण के साथ दुर्ग के सभी परियोजना संभाग को शामिल किया गया है।
एसई सर्किल बिलासपुर में बिलासपुर के साथ अंबिकापुर और रायगढ़ को शामिल किया गया है।
जगदलपुर एसई सर्किल में जगदलपुर के साथ राजनांदगांव परियोजना संभाग को रखा गया है।
राजनांदगांव परियोजना संभाग को जगदलपुर एसई सर्किल में रखे जाने को चूक माना जा रहा है। इस संबंध में अभियांता कल्याण संघ के अध्यक्ष इंजीनियर एनआर छीपा ने कहा कि पहले राजनांदगांव को रायपुर सर्किल में रखा गया था, जो उचित था। राजनांदगांव से जगदलपुर की दूरी 300 किमी से अधिक है। ऐसे में एसई कार्यालयों को मॉनिटरिंग के लिए इतना लंबा सफर तय करना पड़ेगा। इसी तरह राजनांदगांव एसई को छोटे-बड़े कामों के लिए जगदलपुर की दौड़ लगानी पड़ेगी। इससे पैसा और समय दोनों की बरबादी होगी।