CSPDCL Samadhan Yojana Petition रायपुर । छत्तीसगढ़ में बिजली उपभोक्ताओं के बकाया बिलों के निपटारे की दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (CSPDCL) ने आधिकारिक तौर पर “मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना-2026” के अनुमोदन (Approval) के लिए राज्य विद्युत नियामक आयोग के समक्ष याचिका (Petition) पेश कर दी है।
यह याचिका विद्युत अधिनियम 2003 की विभिन्न धाराओं के तहत दायर की गई है, जिसका उद्देश्य प्री-पेड मीटरिंग प्रणाली को सुचारू रूप से लागू करने से पहले पुराने बकाये का समाधान करना है ।
याचिका में क्या है? (Technical Facts)
याचिका में कंपनी ने योजना को लागू करने के पीछे तकनीकी और वित्तीय कारण (Financial Reasons) बताए हैं:
- डूबत ऋण का समाधान: कंपनी ने इसे “बट्टे खाते में डाले गए डूबत ऋण” (Bad Debts Written Off) के प्रावधानों के तहत पेश किया है।
- प्री-पेड मीटरिंग: भविष्य में लागू होने वाली प्री-पेड मीटरिंग प्रणाली के लिए पुराने बकाये को साफ करना एक अनिवार्य शर्त (Mandatory Condition) बताई गई है ।
- बड़ा बकाया राशि: दिसंबर 2025 तक सक्रिय और निष्क्रिय उपभोक्ताओं पर कुल बकाया राशि 5095 करोड़ रुपये तक पहुँच चुकी है ।
किसे कितनी राहत का प्रस्ताव? (Proposed Relief)
याचिका में प्रस्तावित छूट का गणित काफी बड़ा है, जो उपभोक्ताओं के लिए एक लाइफलाइन (Lifeline) साबित हो सकता है:
प्रस्तावित छूट की मुख्य बातें
- निष्क्रिय उपभोक्ता (Disconnected): 4 लाख उपभोक्ताओं की मूल राशि में ₹186 करोड़ और अधिभार में ₹41 करोड़ की छूट प्रस्तावित है ।
- सक्रिय बीपीएल (Active BPL): लगभग 12.20 लाख उपभोक्ताओं के लिए कुल ₹387.46 करोड़ की छूट का प्रस्ताव है。
- घरेलू एवं कृषि: सक्रिय घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं के लिए ₹161 करोड़ की राहत की योजना है。
पुराने अनुभवों से लिया सबक
कंपनी ने आयोग को बताया है कि पिछले 15 वर्षों में लागू की गई विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं (Incentive Schemes) में केवल अधिभार (Surcharge) में छूट दी गई थी, जिससे मात्र 67,593 उपभोक्ता ही लाभ उठा सके । इसीलिए इस नई योजना में मूल राशि (Principal Amount) में भी 50% से 75% तक की भारी छूट का प्रस्ताव रखा गया है ।
इन 3 राज्यों की ‘सक्सेस स्टोरी’ बनी आधारवितरण कंपनी ने आयोग को अपनी याचिका में 3 पड़ोसी राज्यों का हवाला (Case studies) देते हुए बताया है कि वहां भी ऐसी योजनाएं सफल रही हैं:
- बिहार: अगस्त 2017 तक के बकाया में कुटीर ज्योति उपभोक्ताओं को केवल 2000 रुपये जमा करने की छूट दी गई ।
- झारखंड: अगस्त 2024 तक के करीब 3620 करोड़ रुपये के बकाया बिल माफ करने का कैबिनेट फैसला ।
- मध्य प्रदेश: जून 2018 की स्थिति में बीपीएल और श्रमिकों का 100% सरचार्ज और 50% मूल बकाया माफ किया गया।
आयोग में 12 मई को सुनवाई
नियामक आयोग अब इस पर जनता की राय लेगा। यदि आप भी इस योजना पर अपना सुझाव या आपत्ति (Objections) देना चाहते हैं, तो समय नोट कर लें:
- दावा-आपत्ति की अंतिम तिथि: 4 मई 2026 तक।
- अंतिम सुनवाई (Final Hearing): 12 मई 2026।
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