CSPDCL रायपुर। छत्तीसगढ़ में बिजली सब स्टेशनों के टेंडर का विवाद खत्म नहीं हो रहा है। विवाद के बीच जैसे- तैसे टेंडर की प्रक्रिया पूरी हुई तो अब आवंटन पर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप लग रहा है कि बिना नियमों का पालन किए ही सब स्टेशनों का आवंटन किया जा रहा है। कई ठेकेदारों ने लेबर लाइसेंस जमा नहीं किया है, फिर भी उन्हें ठेका दे दिया गया है।
आरोप है कि कंपनी प्रबंधन ठेकेदारों पर इतना मेहरबान है कि कई ठेकेदारों ने अभी तक लेबर लाइसेंस जमा ही नहीं किया है और उन्हें सब स्टेशन आबंटित कर दिए गए हैं। इतना ही नहीं पहली बार प्रबंधन ने सब स्टेशनों के टेंडर को प्रोविजिनल अनुमति प्रदान की है। जिसको लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
पावर कंपनी में 1500 से अधिक 33/11 केवी सब स्टेशनों के लिए टेंडर निकाला गया। इससे बड़ी संख्या में ठेकेदारों ने भाग लिया। विवादों के बीच 23 ठेकेदारों को सब स्टेशनों के संचालन का जिम्मा मिला। हाल ही में ठेकेदारों को सब स्टेशन आबंटित किए गए।
बताते हैं कि सब स्टेशन तो आबंटित कर दिए हैं लेकिन अब भी आधा दर्जन ठेकेदारों ने कंपनी में लेबर लाइसेंस जमा नहीं किया है। बिना लेबर लाइसेंस जमा किए जल्दबाजी में सब स्टेशन आवंटन करने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पूर्व में कंपनी प्रबंधन ने ठेकेदारों को लेबर लाइसेंस जमा करने समय सीमा तय भी की थी। इसके बाद भी कई ठेकेदारों ने लेबर लाइसेंस जमा नहीं किए।
ढाई सौ से अधिक सब स्टेशन बेरोजगार इंजीनियरों के लिए रखे गए थे। कुछ बेरोजगारों द्वारा इंकार किए जाने के बाद बचे हुए सब स्टेशन ठेकेदारों को आबंटित किए गए।
इसमें भी प्रबंधन ने ऐसे चहेते ठेकेदारों को आबंटित कर दिए, जिनका टर्न ओवर दूसरों से कम था। इधर, कंपनी प्रबंधन द्वारा सब स्टेशनों के टेंडर व आबंटन प्रक्रिया को परमानेंट के बजाय प्रोविजिनल अनुमति प्रदान की गई है। बताते हैं कि विवाद और शिकायत को देखते हुए प्रबंधन ने पहली बार प्रोविजिनल अनुमति दी है।