CSPDCL रायपुर। छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली वितरण कंपनी अपने पेंशनर्स पर एरियर्स की वसूली के लिए दबाव बनाए हुए है। बिजली बिल जमा नहीं करने वाले छोटे बकायादारों की भी बिजली काटी जा रही है। इसके बावजूद कंपनी के बकाया राजस्व का आंकड़ा तेजी से बढ़ता जा रहा है। इसी वजह से कंपनी के बकाया वसूली पर अब सवाल उठने लगा है।
छत्तीसगढ़ में 5767 बकायादार ऐसे हैं, जिन पर एक लाख से अधिक का बिजली बिल बकाया है। इन रसूखदार उपभोक्ताओं पर 119 करोड़ रुपए का बिल बकाया है। छोटे बकायादारों के खिलाफ तो धड़ाधड़ कार्रवाई चल रही है लेकिन बड़े बकायादारों को बिल भुगतान करने बार-बार मौका दिया जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों से बिजली वितरण कंपनी पर बकाया बिल का बोझ बढ़ रहा है। न केवल घरेलू उपभोक्ता, बल्कि सरकारी विभाग भी महीनों तक बिजली बिल का भुगतान नहीं कर रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो वर्तमान में वितरण कंपनी को विभिन्न श्रेणी के उपभोक्ताओं से 7 हजार करोड़ रुपए से अधिक की बकाया राशि वसूल करनी है। बकाया राशि वसूल करने प्रदेशभर में अभियान चलाया जा रहा है। बकाया बिल नहीं देने पर घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली काटी जा रही है लेकिन कार्यवाही को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। बिजली कनेक्शन काटने की कार्रवाई केवल छोटे उपभोक्ताओं पर हो रही है जबकि रसूखदार बकायादारों के घरों और दफ्तरों तक बिजली अमला पहुंच नहीं रहा है।
घरेलू उपभोक्ताओं में 20 हजार रुपए तक के 10 लाख उपभोक्ताओं पर 2184 करोड़ रुपए बकाया हैं। वहीं 5767 ऐसे रसूखदार उपभोक्ता हैं, जिन पर ही 119 करोड़ रुपए का बिल बकाया है। इन प्रत्येक रसूखदार उपभोक्ताओं पर 1 लाख रुपए से अधिक का बिल बकाया है।
बताते हैं कि इन बड़े बकायादारों को बार-बार मौका दिया जा रहा है, फिर भी वे बिल का भुगतान नहीं कर रहे हैं। कुछ तो ऐसे हैं, जो किस्तों में भुगतान का वादा कर भी बिल नहीं दे रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा 1304 बड़े बकायादार कोरबा क्षेत्र में हैं। इसके अलावा कुनकुरी में 625, सूरजपुर में 348, बिलासपुर में 273, रायपुर में 270, सरगुजा में 226 तथा महासमुंद में 222 रसूखदार उपभोक्ता हैं।
बताते हैं कि बड़े बकायादारों में कई विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े लोग हैं। जो किसी न किसी कारण से स्थानीय अधिकारियों पर दबाव बनाकर बिजली बिल का भुगतान करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे रहे हैं। हैं। कनेक्शन काटने की नोटिस जाने पर उच्च स्तर से दबाव अधिकारियों पर आ जाता है। यही कारण है कि बड़े बकायादारों पर कार्रवाई भी नहीं हो पा रही है।
जिन उपभोक्ताओं पर 1 लाख से ज्यादा का बिजली बिल बकाया है, उनकी संख्या जिलावार इस प्रकार है। बालोद 27, बलरामपुर- 126, बस्तर – 95, बलौदाबाजार- 108, बेमेतरा 30, बीजापुर- 58, बिलासपुर- 273, चिरमिरी भरतपुर 171, दंतेवाड़ा 132, धमतरी 27, दुर्ग- 119, गरियाबंद 38, गौरेला-पेंड्रा मरवाही- 80, जांजगीर- 730, कांकेर- 31, कोंडागांव 46, कोरवा 1304, कोरिया 54, कुनकुरी-625, महासमुंद 222, मुंगेली 160, नारायणपुर- 27, रायगढ़- 175, रायपुर-270, सक्ती- 135, सारंगढ़ बिलाईगढ़ 44, सरगुजा 226, सुकमा- 86, सूरजपुर- 348।
प्रदेश में सरकारी विभागों पर भी 3 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि बकाया है। बार-बार नोटिस और मंत्री स्तर से पत्राचार के बाद भी सरकारी विभाग बकाया बिल के भुगतान में आनाकानी कर रहे हैं।
नगरीय प्रशासन विभाग पर सबसे ज्यादा 1900 करोड़ रुपए का बिल बकाया है। साहबों के दफ्तरों में रोजाना धड़ल्ले से बिजली जल रही है लेकिन बिल देने के लिए राशि दबाकर बैठ हैं।
पावर कंपनी प्रबंधन भी सरकारी दफ्तरों की बिजली काटने में नाकाम है। घरेलू बकायादारों के बिजली कनेक्शन तो धड़ाधड़ काटे जा रहे हैं लेकिन सरकारी दफ्तरों की बिजली काटने में उनके हाथ कांप रहे हैं।