CSPGCL का सुपर थर्मल पावर प्लांट भी नहीं पाट पाएगा बिजली की मांग और उत्पादन के अंतर की खाई

CSPGCL रायपुर। छत्तीसगढ़ में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। शनिवार (5 अप्रैल) को रात 7:50 बजे प्रदेश में बिजली की मांग 6282 मेगावाट थी। इस दौरान राज्य के पास 6345 मेगावाट बिजली उपलब्ध थी। बिजली की इस उपलब्धता में राज्य के सरकारी उत्पादन संयंत्रों की हिस्सेदारी केवल 2426 मेगावाट थी। यानी मांग की तुलना में उत्पादन आधे से भी कम। ऐसे में 1320 मेगावाट का प्रस्तावित सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट भी राज्य में बिजली की मांग और उत्पादन की इस बड़ी खाई को पाट नहीं पाएगा।
जानिए.. कहां से मिल रही है बिजली
छत्तीसगढ़ में बिजली की मांग और उत्पादन में बड़े अंतर के बावजूद बिजली कटौती नहीं करनी पड़ रही है, क्योंकि राज्य के पास बिजली की पर्याप्त उपलब्धता है। शनिवार को राज्य के पास उपलब्ध 6345 मेगावट बिजली में से 2426 मेगावाट सीएसपीजीसीएल के संयंत्रों से मिल रहा था। 160 मेगावाट आईपीपी और सीपीसी के जरिये मिल रहा था। बाकी 3684 मेगावट बिजली केंद्रीय कोटे से ली जा रही थी।
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जानिए कितनी है CSPGCL के संयंत्रों की उत्पादन क्षमता
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी के संयंत्रों की कुल स्थापित क्षमता 2978 मेगावाट है। इसमें ताप बिजली 2840 और जल विद्युत 138.70 मेगावॉट शामिल है। शनिवार की शाम को कोरबा वोस्ट से 953, डीएसपीएम से 473 मेगावाट बिजली मिल रही थी। इसी तरह मडवा से 912 और बांगो जल विद्युत संयंत्र से 80 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा था। बांगों की एक यूनिट बंद थी।
CSPGCL नए संयंत्र से उत्पादन शुरू होने में लगेगा चार से पांच साल
1320 मेगावाट उत्पादन क्षमता वाले जिस सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट का काम शुरू हुआ है, उससे उत्पादन शुरू होने में चार से पांच साल का वक्त लग सकता है। संयंत्र का 98 प्रतिशत भी पीएलएफ आता है तो 1300 मेगावाट बिजली मिलेगी। छत्तीसगढ़ विद्युत अभियंता कल्याण संघ के अध्यक्ष इंजीनियर एनआर छीपा का कहना है कि इसके बाद भी राज्य में बिजली की मांग और उत्पादन में बड़ा अंतर रह जाएगा।

अभियंता कल्याण संघ की तरफ से कई बार लिखा जा चुका है पत्र
अभियंता कल्याण संघ के अध्यक्ष इंजीनियर छीपा ने बताया कि छत्तीसगढ़ में बीते 10-15 वर्षों में बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है। इस दौरान उत्पादन क्षमता में वृद्धि के स्थान पर उल्टे कमी आ गई। इसको लेकर अभियंता कल्याण संघ की तरफ से सरकार और कंपनी को कई बार पत्र लिखकर अवगत कराया गया। पूर्व सीएम भूपेश बघेल को भी पत्र लिखा गया था। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के शपथ ग्रहण के बाद उन्हें बधाई देने के साथ ही संघ की तरफ से पत्र लिखकर उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर ध्यान देने का आग्रह किया गया था।
CSPGCL निजी बिजली उत्पादकों से प्रदेश की जनता को क्या लाभ
अभियंता कल्याण संघ के अध्यक्ष इंजीनियर छीपा ने कहा कि राज्य में प्राइवेट सेक्टर के कई पावर प्लांट हैं। केंद्रीय बिजली संयंत्र भी हैं। इन सभी की उत्पादन क्षमता 22 हजार मेगावाट से अधिक है, लेकिन इससे प्रदेश की आम जनता को कोई लाभ नहीं है। सरकार एग्रीमेंट करती है, इसके तहत कुछ बिजली उत्पादन लागत पर मिल सकती है, लेकिन वह बिजली भी राज्य के सरकारी संयंत्रों की तुलना में महंगी पड़ती है।
CSPGCL की तुलना में कितनी महंगी है दूसरों की बिजली
राज्य की बिजली वितरण कंपनी ने 2022-23 में राज्य की बिजली उत्पादन कंपनी से खरीदी गई बिजली के लिए प्रति यूनिट तीन रुपये 48 पैसे का भुगतान किया। एनटीपीसी समेत अन्य केंद्रीय उत्पादन संयंत्र चार रुपये 40 पैसा प्रति यूनिट भुगतान किया।