CSPGCL रायपुर। छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली उत्पादन कंपनी (सीएसपीजीसीएल) में खरीदी को लेकर गंभीर आरोप लग रहे हैं। मामला 1700 करोड़ का है। इसको लेकर ऊर्जा सचिव और कंपनी के चेयरमैन डॉ. रोहित यादव से शिकायत की गई है।
इस मामले में छत्तीसगढ़ रिटायर्ड पावर इंजीनियर्स एवं ऑफिसर्स एसोसिएशन ने कंपनी के अध्यक्ष डॉ. रोहित यादव से इस संबंध में लिखित शिकायत की है। एसोसिएशन के महासचिव एसजी ओक ने अध्यक्ष को पत्र लिखकर पूरे मामले की शिकातय करते हुए इस पर रोक की मांग की है।
मामला कोयला से सल्फर को अलग करने के लिए संयंत्रों की स्थापना से जुड़ा है। इन संयंत्रों के लिए उपकरणों व सामग्रियों की खरीदी होनी है। इस मामले में आरोप है कि केंद्र सरकार के नोटिफिकेशन के बाद भी विद्युत नियामक आयोग के निर्देशों को दरकिनार किया जा रहा है। कंपनी इन आदेशों और निर्देशों की अनदेखी करते हुए 1700 करोड़ रुपए की सामग्री खरीदी करने पर अड़ी हुई है।
एसोसिएशन के महासचिव ने अपने पत्र में बताया है कि उत्पादन कोयला से सल्फर को अलग करने वाले दो संयंत्र लगाने की तैयारी में है। एक संयंत्र कोरबा स्थित 500 मेगावॉट और दूसरा मड़वा स्थित 1 हजार मेगावॉट क्षमता के पावर प्लांटों के समीप लगाने का प्रस्ताव है। इसके लिए आदेश भी जारी कर दिया गया है।
कोरबा में स्थापित किए जाने वाले सल्फर प्लांट की लागत 700 करोड़ और मड़वा की लगात 1 हजार करोड़ रुपए हैं। दोनों प्लांटों के लिए करोड़ों रुपए के उपकरणों और सामग्रियों की खरीदी की जानी है।
एसोसिएशन के महासचिव एसजी ओक ने अध्यक्ष डॉ. यादव को लिखे पत्र में कहा है कि कोरबा के आसपास जो कोयला है, उसमें सल्फर का अंश बहुत ही कम है। ऐसे में सल्फर को अलग करने के लिए अलग से प्लांट स्थापित करने का कोई औचित्य नहीं है।
भारत सरकार के नोटिफिकेशन 11 जुलाई के परिपालन में छत्तीसगढ़ विद्युत नियामक आयोग ने जनरेशन कंपनी को सामग्रियों की खरीदी को लेकर रिव्यू पिटिशन देने निर्देशित किया था लेकिन कंपनी प्रबंधन ने कोई पहल नहीं की। एसोसिएशन के अनुसार मड़वा के मुख्य अभियंता कोसरिया ने सामग्रियों की खरीदी की प्रक्रिया पर रोक लगा दी लेकिन कोरबा ने कोई कार्रवाई नहीं की। मड़वा का विद्युत गृह सी कैटेगरी में आता है।
संयंत्रों पर होने वाले महासचिव ओक ने कहा कि खर्च की वसूली उपभोक्ताओं से की जाएगी लेकिन इसकी कोई परवाह कंपनी के मुख्य अभियंता को नहीं है। कंपनी प्रबंधन उपभोक्ताओं पर 1700 करोड़ रुपए का बोझ डालने पर आमादा है। एसोसिएशन ने आयोग के निर्देशों की अवहेलना कर रहे कंपनी प्रबंधन पर लगाम लगाते हुए सामग्री खरीदी पर तत्काल रोक लगाने की पहल करने का आग्रह अध्यक्ष से किया है।