CSPTCL रायपुर। छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली कंपनी में प्रबंध निदेशक (MD) की कुर्सी के लिए रिश्वतखोरी का मामला सामने आया है। पावर कंपनी के एक इंजीनियर ने ही 13 करोड़ रुपए रिश्वत देकर एमडी की कुर्सी हासिल की। यह खुलासा आर्थिक अपराध अन्वेष्ण ब्यूरो (EOW) की जांच में हुआ है।
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए कथित घोटालों की जांच ईओडब्ल्यू कर रही है। इसमें कस्टम मिलिंग घोटाला भी शामिल है। इसी मामले की जांच के दौरान के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि पावर कंपनी में एमडी की कुर्सी के लिए 13 करोड़ का लेनदेन हुआ है।
ईओडब्ल्यू ने कस्टम मिलिंग घोटाला में आरोपी दीपेन चावड़ा के खिलाफ हाल ही में रायपुर की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल किया है। इसी चार्जशीट में दीपेन के जरिये हुए लेनदेन में पावर कंपनी के एमडी की कुर्सी के लिए भी रकम दिए जाने का उल्लेख है।
ईओडब्ल्यू की चार्जशीट के अनुसार इंजीनियर अशोक कुमार ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी (CSPTCL) का एमडी बनने के लिए 13 करोड़ रुपए दिया था। अशोक कुमार ने यह रकम दीपेन के जरिये दिया था।
अशोक कुमार ने 5 दिसंबर 2019 को सीएसपीटीसीएल के एमडी पदभार ग्रहण किया था। वे 8 जुलाई 2021 तक इस पद पर रहे। अशोक कुमार के बाद सरकार ने संजय तेलंग को एमडी बनाया। तब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। अशोक कुमार अभी किसी केंद्रीय संस्थान में पदस्थ हैं।
चार्जशीट के अनुसार अशोक कुमार ने पैसा एमडी बनने के बाद दिया था। दिसंबर 2019 में एमडी बनने के बाद फरवरी 2020 में उन्होंने 13 करोड़ रुपए दिया था। ईओडब्ल्यू के सूत्रों के अनुसार सौदा एमडी बनने के पहले हुआ और कुर्सी मिलने के बाद रकम दी गई।
ईओडब्ल्यू की चार्जशीट के अनुसार अनवर ढेबर ने अशोक कुमार को दीपेन चावड़ा का नंबर भेजा। इसके कुछ समय बाद अशोक कुमार ने अनवर ढेबर को पैसेज किया- 13 फाइल हेंडओवर टू श्री चावड़ा, फॉर कइंड इनफार्मेशन। इसके जवाब में अनवर ढेबर ने ओके लिखा।