Chhattisgarhकर्मचारी हलचल

बिजली कंपनी में प्रमोशन स्कैम: एक इंजीनियर का ऑर्डर होल्ड; दूसरे पर मेहरबानी क्यों?

रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (CSPTCL) में असिस्टेंट इंजीनियर (AE) से एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (EE) के पदों पर हुई पदोन्नति का मामला अब गरमा गया है। चतुरपोस्‍ट.कॉम (Chaturpost.com) की खबर का बड़ा असर (Impact) हुआ है। प्रबंधन ने आनन-फानन में एक इंजीनियर के प्रमोशन पर तो रोक लगा दी है, लेकिन दूसरे को क्लीन चिट दे दी गई है, जिससे विभाग के भीतर भारी असंतोष (Dissatisfaction) देखा जा रहा है।

क्या है पूरा विवाद? (The Dispute)

छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली कंपनी ने 17 अप्रैल को 9 एई (AE) को ईई (EE) बनाने का आदेश जारी किया था। जैसे ही लिस्ट बाहर आई, भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के आरोप लगने लगे। आरोप है कि मेरिट लिस्ट में काफी पीछे होने के बावजूद कुछ खास लोगों को प्रमोट (Promote) कर दिया गया।

बड़ी कार्रवाई: चतुरपोस्‍ट की खबर के बाद कंपनी ने ओमप्रकाश रात्रे के प्रमोशन ऑर्डर पर रोक (Abeyance) लगा दी है। रात्रे मेरिट में 17वें नंबर पर थे, लेकिन 8 सीनियर इंजीनियरों को नजरअंदाज कर उन्हें प्रमोट किया गया था।

राजीव त्रिपाठी पर ‘चुप्पी’ ने खड़े किए सवाल

हैरानी की बात यह है कि इसी सूची में राजीव कुमार त्रिपाठी का नाम भी विवादों में है। त्रिपाठी मेरिट सूची में 8वें नंबर पर थे और उन्होंने भी अपने से सीनियर एक इंजीनियर को सुपरसीड (Supersede) किया है। प्रबंधन ने रात्रे पर तो कार्रवाई की, लेकिन त्रिपाठी के मामले में चुप्पी साध ली है। अब सवाल यह उठ रहा है कि अगर रात्रे का प्रमोशन गलत था, तो त्रिपाठी का सही कैसे?

नियमों की धज्जियां: बिना लिस्ट के ही बांट दिए पद

विभागीय सूत्रों के अनुसार, किसी भी पदोन्नति से पहले Final Gradation List (अंतिम वरिष्ठता सूची) का प्रकाशन अनिवार्य है। लेकिन CSPTCL ने इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया (Democratic Process) का पालन नहीं किया:

  • कोई लिस्ट नहीं: बिना किसी आधिकारिक ग्रेडेशन लिस्ट के ही सीधे प्रमोशन ऑर्डर जारी कर दिए गए।
  • दावा-आपत्ति का मौका नहीं: इंजीनियरों को अपनी सीनियरिटी पर आपत्ति (Objections) दर्ज कराने का अवसर ही नहीं दिया गया।
  • मेरिट की अनदेखी: 2018 के भर्ती विज्ञापन के अनुसार, वरिष्ठता का आधार परीक्षा के अंक होने चाहिए, जिसे पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया।

जाकनारों की राय

प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी सीनियर को प्रमोशन से रोका जाता है, तो उसके लिए ठोस Adverse Remarks (प्रतिकूल टिप्पणी) होनी चाहिए। लेकिन इस केस में टॉप मेरिट वाले इंजीनियरों को बिना किसी कारण के पीछे धकेल दिया गया है।

एक पर कार्रवाई और दूसरे पर चुप्पी ने पावर कंपनी की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। क्या प्रबंधन अपनी गलती सुधारते हुए पूरी लिस्ट की समीक्षा (Review) करेगा, या यह विवाद कोर्ट की दहलीज तक पहुंचेगा?


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S. J. Kumar

पत्रकारिता के क्षेत्र में 22 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव । सुदीर्घ करियर में राष्ट्रीय समाचार पत्रों में महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। जटिल मुद्दों के सरल विश्लेषण और खोजी रिपोर्टिंग के साथ राजनीति, प्रशासन और समसामयिक विषयों पर गहरी पकड़ है। पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वर्तमान में Chaturpost.com में सेवाएं दे रहे हैं।
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