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छत्तीसगढ़ बिजली कंपनी में ‘प्रमोशन’ बड़ा बवाल: वरिष्ठता सूची की अनदेखी कर चहेतों को प्रमोट करने का आरोप

CSPTCL Promotion Scam

CSPTCL रायपुर। छत्तीसगढ़ की सरकारी बिजली कंपनी में इंजीनियरों की पदोन्नति (Promotion) को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 17 अप्रैल 2026 को जारी असिस्टेंट इंजीनियर (AE) से एग्जीक्यूटिव इंजीनियर (EE) की प्रमोशन लिस्ट पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि विभाग ने अपनी ही मेरिट लिस्ट और वरिष्ठता नियमों (Seniority Rules) को ताक पर रखकर ‘सुपरसीड’ (Supersede) का खेल खेला है।

सीनियर पिछड़े, जूनियर बने बॉस‘ (The Superseding Game)

विवाद की मुख्य जड़ 2018 की भर्ती से जुड़ी है। उपलब्ध अंकों (Scorecard) के अनुसार, कई अभ्यर्थी ऐसे हैं जिनका प्रदर्शन और मेरिट रैंक वर्तमान में प्रमोट किए गए इंजीनियरों से कहीं बेहतर था।

इंजीनियरों का अंक

🔍 गायब है ‘ग्रेडेशन लिस्ट’ (The Missing Gradation List)

किसी भी विभाग में प्रमोशन से पहले Final Gradation List (अंतिम वरिष्ठता सूची) का प्रकाशन अनिवार्य है। लेकिन CSPTCL के मामले में चौकाने वाली बात सामने आई है:

  • कोई सूची नहीं: प्रमोशन ऑर्डर जारी होने तक विभाग ने आधिकारिक ग्रेडेशन लिस्ट सार्वजनिक नहीं की।
  • दावा-आपत्ति का मौका नहीं: बिना लिस्ट के इंजीनियरों को अपनी वरिष्ठता पर दावा-आपत्ति (Objections) दर्ज करने का अवसर ही नहीं मिला।
  • सीधा आदेश: विभाग ने सीधे पदोन्नति आदेश जारी कर दिया, जिसे प्रशासनिक भाषा में ‘अलोकतांत्रिक’ माना जाता है।

भर्ती नियमों का उल्लंघन (Violation of Recruitment Terms)

2018 के भर्ती विज्ञापन और 2019 के नियुक्ति आदेश में स्पष्ट उल्लेख था कि ट्रेनिंग और प्रोबेशन की शर्तें पूरी होने के बाद ही स्थाई वरिष्ठता तय होगी। नियमों के अनुसार:

  1. Selection Merit: वरिष्ठता का मुख्य आधार चयन परीक्षा के अंक होते हैं।
  2. Efficiency: यदि किसी सीनियर को रोका गया है, तो उसकी ठोस वजह (Adverse Remarks) होनी चाहिए। ताजा सूची में ऐसे कई नाम गायब हैं जो मेरिट सूची में टॉप पर थे।

❓ खबर के अहम सवाल (Key Questions)

  • क्या चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए ग्रेडेशन लिस्ट छिपाई गई?
  • क्या DPC (विभागीय पदोन्नति समिति) ने मेरिट लिस्ट को आधार नहीं बनाया?
  • सीनियर इंजीनियर्स की योग्यता को नजरअंदाज करने का दोषी कौन है?

सुपरसीडिंग का ‘मास्टर गेम’ (The Numbers Game)

दस्तावेजों और अंकों की गणना (Calculation) से पता चलता है कि वरिष्ठता सूची में भारी हेरफेर हुआ है:

  1. ओमप्रकाश रात्रे (Omprakash Ratre): 2019 की वरिष्ठता सूची में इनका नाम 17वें नंबर पर थे। लेकिन प्रमोशन लिस्ट में इन्हें 7वें नंबर पर जगह मिली। इन्होंने अपने से ऊपर के 8 सीनियर इंजीनियरों को सुपरसीड (Supersede) किया है।
  2. राजीव त्रिपाठी (Rajiv Tripathi): सूची में 9वें नंबर पर होने के बावजूद इन्होंने अपने से ऊपर के योग्य अधिकारी को पीछे छोड़ते हुए प्रमोशन पाया।
नियुक्ति पत्र में दर्ज नियम

मेरिट बनाम ‘मैनेजमेंट’ (Merit vs Management)

2018 के भर्ती विज्ञापन और नियुक्ति शर्तों के अनुसार, चयन परीक्षा के अंक ही भविष्य की वरिष्ठता का आधार होने थे।

विशेषज्ञों का नजरिया (Legal Perspective)

इस पूरे प्रकरण पर जानकारों का कहना है कि यह मामला ‘Pick and Choose’ की श्रेणी में आता है, जिसे कोर्ट अक्सर रद्द कर देता है। यदि विभाग के पास सीनियरों को न चुनने का कोई ठोस और वैध कारण (जैसे गंभीर विभागीय जांच) नहीं है, तो यह आदेश अवैध माना जा सकता है।

नोट: chaturpost.com इस मामले में विभाग का पक्ष आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।

CSPTCL में पारदर्शिता (Transparency) का अभाव अब खुलकर सामने आ रहा है। वरिष्ठता सूची जारी न करना और जूनियरों को तरजीह देना, विभाग के भीतर आंतरिक गुटबाजी और असंतोष को बढ़ावा दे रहा है। chaturpost.com इस मामले में बिजली कंपनी के आला अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश कर रहा है ताकि उनका पक्ष भी सामने आ सके।

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