DA Hike रायपुर। छत्तीसगढ़ में मंगाई भत्ता का मुद्दा फिर गरमाता नजर आ रहा है। राज्य में शासकीय सेवकों का महंगाई भत्ता अलग-अलग है। ऐसे में सवाल उठाने लगा है कि एक ही राज्य सरकार के अधीन काम करने वाले शासकीय सेवकों को मिलने वाले महंगाई भत्त में अंतर क्यों है। इस पर धीरे-धीरे कर्मचारी राजनीति गरमाने लगी है।
छत्तीसगढ़ में राज्य सेवा और अखिल भारतीय सेवा के अफसरों को मिल रहे महंगाई भत्ता में दो प्रतिशत का अंतर है। यही अंतर विवाद का कारण बना हुआ है। यहां यह भी गौर करने वाली बात है कि केंद्र सरकार की तरफ से जैसे ही महंगाई भत्ता बढ़ाने का आदेश जारी होता है, राज्य में काम कर रहे अखिल भारतीय सेवा के अफसरों का भी डीए बढ़ जाता है। वहीं, राज्य के कर्मचारियों को महंगाई भत्ता के लिए राज्य सरकार के आदेश का इंतजार करना पड़ता है।
कर्मचारी नेताओं के अनुसार राज्य में पदस्थ अखिल भारतीय सेवा के अफसरों को 55 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिल रहा है। वहीं, राज्य सरकार के शासकीय सेवकों को अभी 53 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिल रहा है। इसको लेकर कर्मचारी संगठनों में नाराजगी है।
एक तरफ अखिल भारतीय सेवा के अफसरों का डीए केंद्र से आदेश जारी होने के दिनांक से बढ़ जाता है। वहीं, राज्य के शासकीय कर्मचारियों को कई महीने इंतजार करना पड़ता है।
कई बार इसकी मांग को लेकर उन्हें आंदोलन करना पड़ता है। ऐसे में राज्य के शासकीय सेवकों का डीए बढ़ाने का आदेश देर से जारी होता है। इसकी वजह से उनका एरियर्स मारा जा रहा है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौर से अब तक ऐसा करके राज्य सरकार अपने कर्मचारियों को करोड़ों रुपए का चपत लगा चुकी है।
महंगाई भत्ता में इस अंतर को लेकर नवा रायपुर स्थित इंद्रावती भवन में कर्मचारी संगठनों की बैठक हुई। शासकीय सेवकों के संयुक्त संगठन कर्मचारी- अधिकारी फेडरेशन के साथ ही कर्मचारी- अधिकारी महासंघ की बैठक हुई।
इस बैठक में महासंघ के संयोजक अनिल शुक्ला, मंत्रालयीन कर्मचरी संघ के अध्यक्ष महेंद्र सिंह राजपूत, संघ के ही तीरथ लाल सेन, स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के अध्यक्ष आलोक मिश्रा, कोषालय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र सिंह ठाकुर, पीआर साहू और प्रेम सिंह कंवर के अलावा जय कुमार साहू समेत अन्य कर्मचरी नेता शामिल थे।
इस बैठक में कर्मचारी संगठनों ने महंगाई भत्ता की दोहरी व्यवस्था पर रोष व्यक्त करते हुए सरकार से सीधा सवाल किया कि यह अंतर क्यों है। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि इसमें जल्द सुधार नहीं हुआ तो सभी संगठन एकजुट होकर आंदोलन करने का फैसला किया है।