
DA News रायपुर। छत्तीसगढ़ के शासकीय सेवक महंगाई भत्ता (डीए) का एरियर्स के लिए हाईकोर्ट जाने की तैयारी में है। इसको लेकर कर्मचारी संगठनों की बैठक बुलाई गई है।
यहां 80 महीने का बकाया है एरियर्स
बता दें कि 2017 से लेकर दिसंबर 2025 के 80 महीनों का महंगाई भत्ता का एरियर्स बकाया है। यह करोड़ों रुपए है। हर बार राज्य सरकार कर्मचारियों का एरियर्स गोल कर दे रही है।

हाईकोर्ट जोन की तैयारी
इसको लेकर छत्तीसगढ़ के विभिन्न कर्मचारी संघ अब हाई कोर्ट की जाने की तैयारी में है। इसी संबंध में एक मांग एक मंच अभियान के प्रांतीय संयोजक करण सिंह अटरिया के द्वारा प्रदेश के समस्त मान्यता व गैर मान्यता प्राप्त कर्मचारी संघों की बैठक 14 फरवरी को रखी गई है।
एक मांग एक मंच
श्री अटेरिया ने बताया कि महंगाई भत्ता एरियर्स की एक सूत्री मांग को लेकर प्रदेश भर में हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है। लगभग 16000 कर्मचारियों का हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन मुख्य सचिव के नाम वित्त सचिव को दिया जा चुका है ।
डीए कर्मचारियों का वैधानिक अधिकार
उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को बड़ा झटका देते हुए कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) को उनका वैधानिक अधिकार करार दिया है। जस्टिस संजय करोल और पीके मिश्रा की बेंच ने 2009 से 2019 तक का बकाया DA जारी करने का आदेश देते हुए ममता सरकार की वित्तीय तंगी वाली दलीलों को खारिज कर दिया है।
कर्मचारी संगठनों ने किया स्वागत
बंगाल के कर्मचारियों के हित में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए एक मांग एक मंच अभियान के प्रदेश संयोजक ने 14 फरवरी को दोपहर 12 बजे स्थान – छत्तीसगढ़ प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ कार्यालय घड़ी चौक के पास पुराने मंत्रालय के सामने रायपुर में बैठक रखी है जिसमें सभी संगठनों के पदाधिकारियों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होने की अपील की गई है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से जागी उम्मीद
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने आज ही बंगाल सरकार को वहां के शासकीय सेवकों का बकाया महंगाई भत्ता देने के निर्देश दिया है। बताया जा रहा है कि बंगाल सरकार ने 2008 से 2019 के बीच कर्मचारियों को महंगाई भत्ता नहीं दिया था। इसकी वजह से बंगाल के शासकीय सेवकों और केंद्रीय सेवकों के महंगाई भत्ता में 40 प्रतिशत का अंतर आ गया था। इसके खिलाफ बंगाल के शासकीय सेवकों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। वहां कर्मचारियों के हित में फैसला आया है।




