DA News रायपुर। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने राज्य के शासकीय सेवकों का बकाया एरियर्स भुगतान के लिए नया मोर्चा खोल दिया है। पश्चिम बंगाल के शासकीय सेवकों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कमल वर्मा ने मुख्य सचिव विकासशील को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने मुख्य सचिव से इस मामले में शीघ्र निर्णय लेने का विनम्र लेकिन दृढ़ मांग की है।
पश्चिम बंगाल शासन के शासकीय कर्मचारियों एवं अधिकारियों को देय तिथि से महंगाई भत्ता का भुगतान नहीं किया जा रहा था। शासन से निरंतर पत्राचार एवं प्रयासों के बावजूद समाधान न मिलने पर कर्मचारी संगठनों द्वारा पश्चिम बंगाल के शासकीय कर्मचारियों एवं अधिकारियों को वर्ष 2009 से वर्ष 2019 तक के महंगाई भत्ता एरियर्स के भुगतान के लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका प्रस्तुत की गई।
सर्वोच्च न्यायालय ने महंगाई भत्ता को कर्मचारियों का मौलिक अधिकार मानते हुए उक्त अवधि का महंगाई भत्ता एरियर्स का भुगतान करने का स्पष्ट आदेश पारित किया है। यह आदेश संपूर्ण देश के शासकीय सेवकों के लिए एक महत्वपूर्ण नजीर (precedent) है।
फेडरेशन के संयोजक ने मुख्य सचिव को लिखे पत्र में कहा है कि अत्यंत खेद का विषय है कि छत्तीसगढ़ राज्य के शासकीय सेवकों को भी जुलाई 2019 से महंगाई भत्ता एरियर्स का भुगतान नहीं किया गया है। इस संबंध में छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन द्वारा शासन से निरंतर पत्राचार किया गया तथा लोकतांत्रिक तरीके से अनेक आंदोलन भी किए गए, लेकिन आज तक इस दिशा में कोई ठोस एवं न्यायोचित निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे शासकीय सेवकों में भारी आक्रोश और निराशा व्याप्त है।
कमल वर्मा ने बताया कि 06 फरवरी 2026 को आयोजित छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन की बैठक में सर्वोच्च न्यायालय के उपरोक्त आदेश को संज्ञान में लेते हुए यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया कि छत्तीसगढ़ शासन से पुनः आग्रह किया जाए कि पश्चिम बंगाल शासन के समान छत्तीसगढ़ के शासकीय सेवकों को भी जुलाई 2019 से लंबित महंगाई भत्ता एरियर्स का भुगतान अविलंब किया जाए।
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन, जो कि 132 मान्यता प्राप्त और गैर-मान्यता प्राप्त संगठनों का प्रतिनिधि संगठन है, छत्तीसगढ़ शासन से विनम्र लेकिन दृढ़ अनुरोध करता है कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की भावना और संवैधानिक प्रावधानों को दृष्टिगत रखते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिया जाए। यदि शासन की तरफ से शीघ्र न्यायोचित निर्णय नहीं लिया जाता है, तो छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन को भी पश्चिम बंगाल के समान न्यायालय की शरण लेने के लिए बाध्य होना पड़ेगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन की होगी।