Dhan रायपुर। छत्तीसगढ़ में धान बड़ा सियासी मुद्दा है। यही वजह है कि धान को लेकर पूरे साल राजनीति होती रहती है। खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ धान को लेकर शुरू होने वाली बयानबाजी नया खरीफ सीजन शुरू होने तक जारी रहता है। अब प्रदेश में धान बोनस को लेकर घमासान शुरू हो गया है। इस खबर में सिलसिलेवार समझिए धान पर क्यों होती है राजनीति और अभी क्यों गरमाया है मुद्दा।
छत्तीसगढ़ में धान अर्थव्यवस्था से लेकर राजनीतिक तक को प्रभावित करता है। राज्य की 70 प्रतिशत आबादी गावों में रहती है और उनकी आय का प्रमुख जरिया कृषि है। प्रदेश में 37 लाख से ज्यादा किसान हैं, इनमें से 25 लाख से ज्यादा धान की खेती करते हैं। एक परिवार में चार सदस्य माने तो यह आंकड़ा एक करोड़ के करीब पहुंच जाता है जो बड़ा वोट बैंक है।
फिलहाल धान के बोनस को लेकर राजनीति गरमाई हुई है। बीते शनिवार 28 फरवरी को राज्य सरकार ने प्रदेश के धान उत्पादक 25 लाख से ज्यादा किसानों को धान के अंतर की राशि (बोनस) का भुगतान किया है जो 10 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा है। इस पर कांग्रेस की तरफ से लगातार बयानबाजी की जा रही है। इसी के जवाब में भाजपा ने पोस्टवार शुरू कर दिया है।
सत्तारुढ़ भाजपा ने कांग्रेस नेताओं और उनके परिजनों को मिले धान बोनस की राशि को सार्वजनिक करते हुए निशाना साधा है। भाजपा के सोशल मीडिया सेल के प्रदेश संयोजक मितुल कोठारी ने कहा कि धान का बोनस लेने के बाद भी कांग्रेस के नेताओं जनता के बीच झूठ फैला रहे हैं। इस पर कांग्रेस की तरफ से भी हमला हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पटलवार करते हुए कहा है कि हां मलामाल हुए हैं, किसान हैं माल उगाया और बेचा तो माल आया।
धान बोनस को लेकर कांग्रेस नेताओं की तरफ से की जा रही बयानबाजी के जवाब में भाजपा ने सोशल मीडियां में पोस्टर जारी किया है। भाजपा ने बताया है कि धान बोनस के रुप में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके परिवार को लगभग नौ लाख रुपए मिला है। वहीं नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत को एक लाख और पीसीसी अध्यक्ष बैज को 35 लाख से ज्यादा मिला है। इसके बाद वे भी जनता से झूठ बोल रहे हैं।
भाजपा की तरफ से सोशल मीडिया में किए गए पोस्ट के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को छह लाख 76 हजार 321 रुपए बोनस मिला है। चैतन्य बघेल के खाते में 64 हजार 35 रुपए तो दीप्ति बघेल के खाते में एक लाख 42 हजार 106 रुपए का भुगतान किया गया है। इसी तरह मुक्तेश्वरी बघेल के नाम पर 44 हजार 737 रुपए का भुगतान किया गया है।
भाजपा के पोस्टर वार के जवाब में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया में पोस्ट किया है, उन्होंने लिखा है कि विष्णुदेव सरकार ने न खाद दिया और न पर्याप्त बिजली दी, फिर भी हमने पसीना बहाया और धान उगाया। पूर्व सीएम ने अपनी सरकार का जिक्र करते हुए लिखा है कि हमारी सरकार की कोशिश थी कि मेहनतकश किसानों को उनकी उपज का पैसा मिले। हमने ईमानदारी से वादा निभाया तो हर किसान को पैसा मिला। भाजपा के 15 साल के राज में किसान आत्महत्या कर रहे थे, हमने उन्हें सम्मान और हक का पैसा दिया।
धान बोनस लेने वाले कांग्रेस के बड़े नेताओं का नाम सार्वजनिक किए जाने पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कड़ी आपत्ति व्यक्त करते हुए पूछा है कि क्या भाजपा में किसान नहीं हैं, क्या उन्होंने धान नहीं बेचा। बैज ने कहा कि भाजपा में साहस है तो मुख्यमंत्री, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष, स्पीकर और भाजपा के बड़े नेताओं को कितना भुगतान किया गया है उसे भी सार्वजनिक करें वरना इस तरह की स्तरहीन राजनीति करना बंद करे।
भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व उपाध्यक्ष गौरीशंकर श्रीवास ने पूर्व मुख्यमंत्री बघेल को अपने गिरेबान में झांकने की सलाह दी है। पहले उन्हें धान के बोनस की राशि देने के लिए दस जनपथ के आदेश का इंतजार करना पड़ता था और राशि उन्हें भी टुकड़ों में लेनी पड़ती थी। उन्होंने कहा कि उन्हें खुद की सरकार ने ज्यादा राशि वह भी एकमुश्त मिल रही है तो इसे स्वीकार करने में क्या समस्या है। धान की अधिकतम कीमत मिलने पर उन्हें बिना किसी संकोच के विष्णुदेव सरकार के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए। श्रीवास ने कहा कि ऐसे में श्री बघेल की बौखलाहट समझ से परे है।