Dhan Kharidi रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी धान खरीदी की व्यवस्था की अहम कड़ी कम्प्यूटर ऑपरेटरों के साथ सरकार ने बड़ी नाइंसाफी कर दी है। खरीफ सीजन 2025-26 के लिए जारी नीति में सरकार ने कम्प्यूटर ऑपरेटरों को तगड़ा झटका दे दिया है। इसकी वजह से कम्प्यूटर ऑपरेटरों के सामने संकट खड़ा हो गया है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने अपनी नई नीति में कम्प्यूटर ऑपरेटरों के सामने आजीविका का संकट खड़ा कर दिया है। सरकार ने इस साल कम्प्यूटर ऑपरेटरों को केवल छह महीने का ही वेतन देने का फैसला किया है, जबकि अभी तक उन्हें पूरे 12 महीने का वेतन मिलता था।
समर्थन मूल्य धान खरीदी कम्प्यूटर ऑपरेटर संघ ने सरकार के इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष ऋषिकांत मोहरे ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य के मेहनतकश धान उपार्जन केंद्र कम्प्यूटर ऑपरेटर के साथ हाल ही में किया गया निर्णय अत्यंत दुखद और अमानवीय है। अब तक कर्मचारियों को पूरे वर्ष का 12 माह का वेतन दिया जा रहा था, किंतु वर्तमान में भाजपा शासन के अधीन इसे घटा कर केवल 6 माह का वेतन कर दिया गया है।
प्रदेश अध्यक्ष मोहरे ने कहा कि सरकार का यह निर्णय उन लाखों परिवारों के जीवन पर सीधा प्रहार है, जिनकी आजीविका इस वेतन पर निर्भर है। पूरे वर्ष भर खेतों में किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने वाले कम्प्यूटर ऑपरेटर अब अपने परिवार की जरूरतें पूरी करने और बच्चों की पढ़ाई जारी रखने को लेकर गहरी चिंता में हैं।हमारा संगठन इस अन्यायपूर्ण और असंवेदनशील निर्णय की कड़ी निंदा करता है। इस फैसले के खिलाफ संघ तीन नवंबर से आंदोलन की तैयारी कर रहा है।
1. 12 माह के वेतन की पूर्व व्यवस्था तुरंत बहाल की जाए।
2. वेतन कटौती के इस निर्णय को तत्काल वापस लिया जाए।
3. विभाग तय कर संविलियन किया जाए।
संघ ने कहा कि कर्मचारी किसी राजनीतिक दल के विरोधी नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था की रीढ़ हैं। उनके साथ अन्याय, पूरे व्यवस्था के साथ अन्याय है। यदि सात दिनों के भीतर उचित निर्णय नहीं लिया गया, तो छत्तीसगढ़ समर्थन मूल्य धान खरीदी कम्प्यूटर ऑपरेटर संघ राज्यव्यापी आंदोलन की राह अपनाने पर बाध्य होगा।