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Directorate of Enforcement  छत्‍तीसगढ़ में 10 स्‍थानों पर रेड में ED ने 40 लाख कैश के साथ जब्‍त किए आपत्तिजनक दस्तावेज़

Directorate of Enforcement  रायपुर। प्रवर्तन निदेशाल Directorate of Enforcement (ED) ने 29 जनवरी को रायपुर और महासमुंद में 10 स्‍थानों पर छापा मारा था। छापे की कार्यवाही पूरी होने के साथ ही इसको लेकर ईडी ने एक बयान जारी किया है। इसमें छापे के दौरान जब्‍त कैश आदि की जानकारी दी है।

संपत्ति के काजग भी जब्‍त

ईडी की तरफ से जारी बयान में बताया गया है कि में 40 लाख रुपये कैश, डिजिटल डिवाइस और कई आपत्तिजनक दस्तावेज़ ज़ब्त किए गए। साथ ही, तलाशी के दौरान शेड्यूल अपराध करने से मिले पैसे से जुड़े लोगों के नाम पर खरीदी गई कई चल और अचल संपत्तियों की भी पहचान की गई।

भारतमाला मुआवजा

डायरेक्टोरेट ऑफ एनफोर्समेंट (ED), रायपुर जोनल ऑफिस ने 29 दिसंबर को PMLA, 2002 के तहत छत्तीसगढ़ में रायपुर और महासमुंद में दस जगहों पर तलाशी ली। यह तलाशी भारतमाला योजना Bharatmala Schemeके तहत रायपुर-विशाखापत्तनम हाईवे प्रोजेक्ट Raipur-Visakhapatnam Highway Project के लिए ज़मीन अधिग्रहण के बदले मिले अवैध मुआवज़े के मामले में हरमीत सिंह खानूजा और अन्य लोगों के रिहायशी और ऑफिशियल ठिकानों पर की गई।

एसीबीईओडब्‍ल्‍यू में दर्ज है मामला

ED ने ACB/EOW ने अभनपुर  के SDO (राजस्व) निर्भय साहू  और अन्य लोगों के खिलाफ इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और भारतीय दंड संहिता, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज FIR दर्ज कर रखा है। इस FIR में आरोप है कि रायपुर-विशाखापत्तनम हाईवे प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण में सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से आधिकारिक रिकॉर्ड में हेरफेर करके आरोपियों ने अवैध मुआवजा लिया था।

ईडी की जांच में खुलास

ED की जांच में पता चला कि आरोपी व्यक्तियों ने कुछ सरकारी कर्मचारियों के साथ मिलकर आपराधिक साज़िश रचकर, भरतमाला प्रोजेक्ट के तहत अधिग्रहित ज़मीन के लिए “जानबूझकर बड़े ज़मीन के टुकड़ों को” परिवार के सदस्यों के बीच पिछली तारीख की एंट्री करके बांट दिया और धोखाधड़ी से ज़्यादा मुआवज़ा हासिल किया।

ज़मीन का यह बनावटी बंटवारा ज़मीन अधिग्रहण से पहले कई छोटी-छोटी ज़मीनों को दिखाने के लिए किया गया था, ताकि मुआवज़े के सिस्टम का फायदा उठाकर ज़्यादा मुआवज़ा क्लेम किया जा सके। रेवेन्यू रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया ताकि यह दिखाया जा सके कि ये बंटवारे अधिग्रहण प्रक्रिया से पहले हुए थे, जिससे ज़्यादा गैर-कानूनी मुआवज़े की रकम मंज़ूर और बांटी गई।

इस तरह मिला अतिरिक्त गैर-कानूनी मुआवज़ा अपराध की कमाई (POC) था और इससे सरकारी खजाने को गलत नुकसान हुआ और आरोपी व्यक्तियों को उसी के बराबर गैर-कानूनी फायदा हुआ।

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