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देश में पहली बार: छत्तीसगढ़ के इस जिले ने पेश किया ‘जेंडर-बैलेंस्ड’ मॉडल, अब पुरुषों और बुजुर्गों की भी होगी सम्मानजनक सुनवाई!

दुग्र पलिस

भिलाई/दुर्ग (chaturpost.com): बदलते दौर में रिश्तों की दरार को भरने के लिए छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले ने एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी चर्चा अब पूरे देश में हो रही है। दुर्ग पुलिस का जेंडर-बैलेंस्ड काउंसलिंग (Gender Balanced Counseling) मॉडल आज टूटते परिवारों के लिए एक नई उम्मीद (New Hope) बनकर उभरा है।

खामोश दर्द को मिली आवाज (Voice to Silent Pain) अक्सर समाज में बुजुर्गों की उपेक्षा या पुरुषों के मानसिक तनाव को अनसुना कर दिया जाता है। लेकिन दुर्ग के सेक्टर-6 स्थित परिवार परामर्श केंद्र (Family Counseling Center) ने इस सोच को बदल दिया है। यहाँ अब केवल महिलाओं की ही नहीं, बल्कि पुरुषों और सीनियर सिटीजन्स की समस्याओं को भी उतनी ही संवेदनशीलता (Sensitivity) के साथ सुना जा रहा है।

क्यों खास है दुर्ग का यह मॉडल? (Key Features):

मुख्यमंत्री और एसएसपी का दृष्टिकोण (Leadership Vision) मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे सामाजिक स्थिरता (Social Stability) के लिए अनिवार्य बताया है। वहीं, दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल के अनुसार, “संवाद और परामर्श की प्रक्रिया पति-पत्नी के विवादों को कोर्ट-कचहरी तक पहुँचने से पहले ही सुलझाने में गेम-चेंजर (Game Changer) साबित हो रही है।”

बुजुर्गों को मिला सुरक्षा कवच (Security for Elderly) परिवारों में संपत्ति विवाद या शराब के लिए बुजुर्गों को प्रताड़ित करने जैसी घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए यह केंद्र ढाल की तरह काम कर रहा है। दुर्ग का यह ‘काउंसलिंग-फर्स्ट’ (Counseling-First) मॉडल न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मार्गदर्शक (Guiding Light) बन गया है।

जानिए’ क्‍या है जेंडर-बैलेंस्ड काउंसलिंग

जेंडर-बैलेंस्ड काउंसलिंग (Gender-Balanced Counseling) पारिवारिक विवादों को सुलझाने की एक समावेशी और निष्पक्ष (Inclusive and Fair) प्रक्रिया है। पारंपरिक परामर्श व्यवस्थाओं में अक्सर केवल एक पक्ष (मुख्यतः महिलाओं) की शिकायतों पर ध्यान दिया जाता था, लेकिन यह नया मॉडल सभी पक्षों को समान महत्व देता है।

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में लागू इस मॉडल की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

1. सभी पक्षों की समान सुनवाई (Equal Hearing)

2. पुरुष काउंसलर की भूमिका (Role of Male Counselors)

3. ‘सीनियर सिटीज़न सपोर्ट बेंच’ का गठन

4. ‘काउंसलिंग-फर्स्ट’ अप्रोच

5. सफल परिणाम (Proven Success)

संक्षेप में, जेंडर-बैलेंस्ड काउंसलिंग समाज के हर वर्ग—चाहे वह पुरुष हो, महिला हो या बुजुर्ग—को एक ही मंच पर सम्मानजनक और संतुलित न्याय दिलाने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है।

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