Electricity (Amendment) 2025 रायपुर। नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स की 3 नवंबर को बड़ी बैठक होने जा रही है। यह बैठक मुम्बई में आयोजित की गई है। इसमें देशभर की सरकारी बिजली कंपनियों के इंजीनियर और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
इस बैठक में सबसे बड़ा मुद्दा पावर सेक्टर का निजीकरण रहने की उम्मीद है। बता दें कि उत्तर प्रदेश के बिजली इंजीनियर और कर्मचारी निजीकरण के विरोध में करीब सालभर से लगातार आंदोलन कर रहे हैं। इसके बावजूद दो वितरण कंपनियों को प्राइवेट सेक्टर में देने के लिए टेंडर निकालने की तैयारी चल रही है।
बिजली कर्मचारी नेताओं के अनुसार 3 नवंबर को मुम्बई में होने वाली इस बैठक में पॉवर सेक्टर के निजीकरण के विरोध में देशव्यापी रणनीति बनाई जाएगी। मुम्बई से ही आंदोलन का ऐलान भी किया जा सकता है। आरोप है कि ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की मीटिंग में विद्युत वितरण कंपनियों को निजी हाथों सौंपने की योजना बनाई गई है।
विद्युत कर्मचारी नेताओं ने बताया कि 10 अक्टूबर को ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स Group of Ministers की मीटिंग में लिए गए निर्णय के अनुसार, केंद्र से मिलने वाली वित्तीय सहायता के नाम पर उत्तर प्रदेश Uttar Pradesh सहित पूरे देश के विद्युत वितरण निगमों Electricity Distribution Corporation को निजी हाथों में सौंपने की कोशिश के विरोध में, राज्य के बिजली कर्मी और इंजीनियर देशभर के बिजली कर्मचारियों के साथ मिलकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेंगे।
बताया जा रहा है कि 10 अक्टूबर को हुई ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स Group of Ministers की मीटिंग में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और राजस्थान के ऊर्जा मंत्री Energy Minister शामिल थे। इनके बीच यह सहमति बनी कि विद्युत वितरण निगमों को केंद्र से मिलने वाली वित्तीय सहायता Financial assistance के लिए तीन विकल्प दिए जाएं।
पहला विकल्प – विद्युत वितरण निगमों की 51% इक्विटी equity बेचकर निजीकरण Privatization करना।
दूसरा विकल्प कम से कम 26% इक्विटी equity निजी क्षेत्र को बेचने और प्रबंधन निजी क्षेत्र को सौंपना।
तीसरा विकल्प विद्युत वितरण निगमों को स्टॉक एक्सचेंज stock exchange में सूचीबद्ध कराना।