
Electricity रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के कोर्ट में गुरुवार से बिजली की नई दरें तय करने के लिए जनसुनवाई की प्रक्रिया हो गई। पहले दिन अलग-अलग सेक्टरों के उपभोक्ताओं ने अपना पक्ष रखा। इस दौरान किसान प्रतिनिधियों ने बिजली पर जमकर भड़ास निकाला। समस्याओं से जूझ रहे किसान प्रतिनिधियों का आयोग के सामने गुस्सा फूट पड़ा।
पुराना मीटर लगाने को बताया किसानों का अपमान
जन सुनवाई के दौरान किसान प्रतिनिधियों ने किसानों के पंप कनेक्शन के लिए पुराना मीटर लगाए जाने का विरोध करते हुए इसके किसानों अपमान बताया। कहा कि उपभोक्ताओं के परिसर से पुराने मीटर निकालकर स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। वहीं पुराने मीटर अब किसानों के पंप कनेक्शन में लगाने की तैयारी है। किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि उतारा हुआ मीटर किसानों को क्यों दिया जा रहा है, यह किसानों का अपमान है।
पंप में भी स्मार्ट मीटर लगाने की मांग
किसान प्रतिनिधियों ने आयोग से आग्रह किया कि किसानों के पंप कनेक्शन में भी स्मार्ट मीटर लगाए जाएं। इससे पावर कंपनी को मीटर रीडिंग के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। किसानों को भी सुविधा होगी।
योजना किसानों के लिए फायदा उठा रही कंपनी
पंप कनेक्शन के लिए सरकार की तरफ से मिलने वाली सब्सिडी में बड़ा खेल करने का आरोप लगाते हुए किसान प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि किसानों के पंप कनेक्शन पर कंपनी 6000 और 7500 यूनिट बिजली की खपत के हिसाब से सरकार से सब्सिडी लेती है, जबकि किसानों की वास्तविक खपत तीन से चार हजार यूनिट ही है।
मीटर नहीं लगाने पर कंपनी की नियत पर सवाल
पंप कनेक्शनों के शत प्रतिशत मीटरकीरण नहीं किए जाने पर नाराजगी जाहिर करते हुए किसान प्रतिनिधियों ने कंपनी की नियत पर सवाल उठाया। कहा कि आयोग के निर्देश के बावजूद पंप कनेक्शनों में मीटर नहीं लाए जा रहे हैं और किसानों को मनमाना बिल भेजा जा रहा है।
डीबीटी का सुझाव
किसान प्रतिनिधियों ने पंप कनेक्शन पर किसानों को मिलने वाली सब्सिडी की राशि किसानों के बैंक खातों में डीबीटी के जरिये देने का प्रस्ताव रखा। कहा कि कंपनी टैरिफ के अनुसार बिलिंग करे और सरकार सब्सिडी का पैसा किसानों के बैंक खातों में जमा कर दे। इससे सरकार और किसान दोनों को लाभ होगा।
बिजली कटौती पर नाराजगी
कृषि पंप कनेक्शन में बिजली कटौती पर भी किसान प्रतिनिधियों ने नाराजगी जाहिर की। शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक बिजली नहीं दी जाती है। इसके बाद ट्रांसफार्मर खराब होने और तकनीकी कारणों से बीच-बीच में बिजली गुल कर दी जाती है।




