Electricity Bill 2025 ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन की केंद्रीय विद्युत मंत्री को दो टूक: यह किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं

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Electricity Bill 2025 न्यूज डेस्क। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन, बिजली कर्मियों के सभी राष्ट्रीय फेडरेशन और नेशनल कोऑर्डिनेशन कमिटी आफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स ने इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को समग्रता में अस्वीकार्य बताते हुए केन्द्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर को ड्राफ्ट बिल 2025 पर अपने कमेन्ट प्रेषित कर दिया है।

पांच बार हो चुकी है संशोधन की कोशिश

केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर को प्रेषित पत्र में लिखा गया है कि एनडीए सरकार में यह छठी बार है जब इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल लाया गया है। इसके पहले वर्ष 2014, वर्ष 2018, वर्ष 2020, वर्ष 2021 और वर्ष 2022 में कुल 5 बार इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल लाया जा चुका है और हर बार इसे व्यापक विरोध के चलते वापस लिया गया है।

यह भी स्वीकार नहीं है

संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) 2025 पूर्व में ले गए पांच बिलों जैसा ही है और इसका उद्देश्य संपूर्ण पॉवर सेक्टर का निजीकरण करना है जो किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

Electricity Bill 2025 बैंक डोर प्राइवेटाइजेशन

उन्होंने बताया कि 09 दिसंबर 2021 को संयुक्त किसान मोर्चे के साथ हुए समझौते में तत्कालीन कृषि सचिव ने लिखित दिया था कि किसानों और स्टेक होल्डर्स को विश्वास में लिए बिना इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल नहीं लाया जाएगा यह उसका सरासर उल्लंघन है।

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संघर्ष समिति ने बताया कि बिल में सेक्शन 14, 42 और 43 के माध्यम से निजी कंपनियों को सरकारी क्षेत्र के नेटवर्क का इस्तेमाल करने की अनुमति देना बैंक डोर प्राइवेटाइजेशन है।

राज्यों के अधिकार में दखल

विडंबना यह है कि सरकारी कंपनी नेटवर्क के परिचालन, अनुरक्षण, अपग्रेडेशन और उसके उच्चीकरण पर सारा पैसा खर्च करेगी और इस नेटवर्क का लाभ उठाकर प्राइवेट कंपनियां पैसा कमाएंगी। ड्राफ्ट बिल में कई आपत्तिजनक बातें हैं किंतु सेक्शन 86 ई के माध्यम से राज्य के विद्युत नियामक आयोग के सदस्यों को हटाने का अधिकार केंद्र सरकार को देना सीधे-सीधे राज्य के अधिकार में दखल है।

दोनों सरकारों का अधिकार बराबर

ध्यान रहे बिजली संविधान में समवर्ती सूची में है जिसका तात्पर्य होता है कि बिजली के मामले में केंद्र और राज्य सरकारों के बराबर के अधिकार है।

Electricity Bill 2025 केंद्रीय इलेक्ट्रिसिटी काउंसिल

इस संशोधन से राज्य सरकार के अधिकारों का सीधे हनन हो रहा है। इसी प्रकार संशोधन की धारा 166 ए में केंद्रीय इलेक्ट्रिसिटी काउंसिल बनाने का प्रावधान किया गया है। इस काउंसिल के माध्यम से केंद्र सरकार राज्यों को बिजली के मामले में निर्देश दे सकेगी।

लालटेन युग में चला जाएगा देश

यह भी समवर्ती सूची में प्रदत्त राज्य सरकारों के अधिकार के विरुद्ध है। संघर्ष समिति ने कहा कि क्रॉस सब्सिडी समाप्त करने से किसानों, गरीबों और घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली की कीमतों में इतनी वृद्धि हो जाएगी कि वे उसे खरीद पाने में सक्षम नहीं होंगे और यह देश को लालटेन युग में ले जाएगी

chatur postNovember 7, 2025
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