Electricity Demand रायपुर। छत्तीसगढ़ में अभी ठीक से गर्मी की शुरुआत नहीं हुई है। दिन में थोड़ी गर्मी बढ़ी है, लेकिन आधी रात बाद से सुबह तक हल्की ठंड महसूस की जा रही है। इसके बावजूद राज्य में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। फरवरी में ही बिजली की मांग रिकार्ड स्तर पर पहुंच गई है। ऐसे में इस बार गर्मी में बिजली की मांग और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
छत्तीसगढ़ में बिजली की मांग छह हजार मेगावाट के पार चली गई है। सोमवार को पीक ऑवर में बिजली की मांग 6237 मेगावॉट तक पहुंच गई थी, जो फरवरी महीने में अब तक की सबसे ज्यादा डिमांड है।
फरवरी में बिजल की डिमांड छह हजार मेगावाट के पार पहुंचने से इस बार अप्रैल- मई में बिजली की मांग में और तेजी आने की अनुमान व्यक्त किया जा रहा है। जानकारों के अनुसार इस बार गर्मी में बिजली की उच्चतम मांग सात हजार मेगावॉट तक जा सकती है।
बिजली अफसरों के अनुसार फरवरी में बिजली की मांग बढ़ने की सबसे बड़ी वजह कृषि पंप और एसी है। हालांकि आधी रात बाद से मौसम थोड़ा ठंडा हो जा रहा है, लेकिन शहरी क्षेत्रों में दिन में गर्मी बढ़ गई है। ऐसे में धीरे- धीरे एसी का उपयोग भी बढ़ रहा है। इसी वजह से बिजली की मांग में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।
बिजली की बढ़ती हुई मांग की पूर्ति के लिए कंपनी प्रबंधन इंतजाम में जुट गया है। राज्यों से बैंकिंग के तहत बिजली ली जा रही है। दिल्ली से 215 मेगावॉट और उत्तरप्रदेश से 500 मेगावॉट बिजली छत्तीसगढ़ को मिल रही है। बैकिंग व्यवस्था के तहत छत्तीसगढ़ यह बिजली जुलाई-अगस्त में दोनों राज्यों को लौटाएगा। इसके अलावा संकट से निपटने के लिए प्राइवेट जनरेटरों से भी शार्ट टर्म पावर परचेस की तैयारी चल रही है।
राज्य निर्माण के बाद बीते 25 सालों में प्रदेश में बिजली कनेक्शनों की संख्या के साथ ही खपत भी तेजी से बढ़ी है। निम्न दाब उपभोक्ताओं की संख्या 64 लाख से ज्यादा है। इनमें घरेलू कनेक्शनों की संख्या 35 लाख से अधिक है। वहीं 4131 उपभोक्ता उच्च दाब वाले हैं। कृषि पम्प कनेक्शन कई गुना बढ़ गए हैं। वर्ष 2000 में केवल 65,922 कृषि पम्प थे। जो बढ़कर 2025 में 5,85,891 हो गए हैं।
बिजली की मांग हर साल बढ़ती जा रही है। एक साल में बिजली की खपत में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। बताते हैं कि मांग अधिक होने पर हाई प्राइड डे अहेड मार्केट (एचपीडीएएम) से बिजली क्रय की जाती है। वन नेशन, वन ग्रिड के आधार पर देशभर के सभी पावर प्लांटों की उत्पादित बिजली ग्रिड में जाती है। उसे आवश्यकतानुसार क्रय करके राज्य अपने यहां बिजली आपूर्ति की व्यवस्था करते हैं।