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छत्तीसगढ़ में बिजली का ‘हाहाकार’: 7000 मेगावाट के पार पहुंची डिमांड, ऑफ पीक में भी मांग असमान पर

Chhattisgarh Electricity Demand Peak Load Shedding News

रायपुर | छत्तीसगढ़ में सूरज की तपिश के साथ-साथ अब बिजली की किल्लत ने आम जनता का पसीना छुड़ाना शुरू कर दिया है। प्रदेश में भीषण गर्मी (Severe Heat) के कारण बिजली की खपत (Electricity Consumption) ने पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। आलम यह है कि राज्य में बिजली की मांग पहली बार 7000 मेगावाट के जादुई आंकड़े को पार कर गई है।

ग्रामीण इलाकों से लगातार लोड शेडिंग (Load Shedding) की खबरें आ रही हैं, जिससे लोगों का जीना मुहाल हो गया है। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर अचानक बिजली की मांग इतनी क्यों बढ़ गई और सरकार इससे निपटने के लिए क्या ‘बैंकिंग’ फॉर्मूला अपना रही है।

टूटा रिकॉर्ड: 17 अप्रैल की रात दर्ज हुई सबसे अधिक मांग

बिजली विभाग से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 17 अप्रैल 2026 (शुक्रवार) की रात 12 बजे प्रदेश में बिजली की मांग 7118 मेगावाट तक पहुंच गई थी। यह छत्तीसगढ़ के इतिहास में अब तक की सर्वाधिक मांग (Peak Demand) मानी जा रही है। पिछले साल अप्रैल के महीने में अधिकतम मांग 7006 मेगावाट थी, जिसे इस बार काफी पहले ही पीछे छोड़ दिया गया है।

हालिया आंकड़ों पर एक नजर (Recent Statistics):


सावधान! इन 3 कारणों से बढ़ रहा है Power Load

  1. AC और कूलर का अंधाधुंध प्रयोग: घरों और दफ्तरों में अब AC और कूलर केवल दिन में ही नहीं, बल्कि 20-20 घंटे तक चल रहे हैं।
  2. कृषि पंपों का लोड: ग्रीष्मकालीन फसलों के लिए प्रदेश के 8 लाख से अधिक कृषि पंप धड़ल्ले से चल रहे हैं, जो अकेले 900 मेगावाट बिजली खींच रहे हैं।
  3. ट्रांसफार्मर फेल होना: अत्यधिक लोड के कारण कई क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर गर्म होकर जवाब दे रहे हैं, जिससे तकनीकी कटौती (Technical Breakdown) हो रही है।

ग्रामीण इलाकों में अघोषित बिजली कटौती (Unannounced Power Cuts)

शहरों में तो स्थिति फिर भी नियंत्रण में है, लेकिन छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों (Rural Areas) में बिजली की लुकाछिपी शुरू हो गई है। उपलब्धता की तुलना में डिमांड अधिक होने के कारण प्रबंधन को मजबूरी में आधे-आधे घंटे की लोड शेडिंग करनी पड़ रही है।

अधिकारियों का कहना है कि वे डिमांड और सप्लाई (Supply and Demand) के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन भीषण गर्मी में मशीनों का साथ न देना एक बड़ी चुनौती (Major Challenge) बन गया है। सब-स्टेशनों में ट्रांसफार्मरों को ठंडा रखने के लिए कूलर और पंखे लगाए गए हैं, फिर भी ओवरहीटिंग की समस्या बनी हुई है।

पिछली नौ दिन की डिमांड रिपोर्ट (Last 9 Days Demand)

दिनांकबिजली की मांग (मेगावाट)
12 अप्रैल6697 MW
13 अप्रैल6938 MW
14 अप्रैल6908 MW
15 अप्रैल6862 MW
16 अप्रैल6939 MW
17 अप्रैल7118 MW (रिकॉर्ड)
18 अप्रैल7078 MW
19 अप्रैल7000 MW
20 अप्रैल7028 MW

बैंकिंग मॉडल: दूसरे राज्यों से ली जा रही है मदद (Power Banking)

बिजली संकट से निपटने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने ‘पावर बैंकिंग’ (Power Banking) का सहारा लिया है। इसके तहत अन्य राज्यों से बिजली उधार ली जाती है और बाद में जरूरत कम होने पर उन्हें वापस कर दी जाती है।

यह बैंकिंग व्यवस्था (Banking System) इसलिए की गई है ताकि उद्योगों और घरेलू उपभोक्ताओं को बिना किसी बड़े व्यवधान के बिजली मिलती रहे।

Expert View: क्या कहते हैं जानकर?

विशेषज्ञों (Experts) का मानना है कि छत्तीसगढ़ में बिजली उत्पादन की क्षमता तो पर्याप्त है, लेकिन वितरण प्रणाली (Distribution System) पर गर्मी का भारी दबाव है। यदि तापमान 45 डिग्री के पार जाता है, तो ट्रांसफार्मरों पर लोड और बढ़ेगा। इसलिए उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे बिजली की बचत (Energy Conservation) करें और अनावश्यक उपकरणों का उपयोग न करें।

छत्तीसगढ़ में बिजली की स्थिति फिलहाल ‘तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में’ है। सरकार और विभाग (CSPDCL) पूरी कोशिश कर रहे हैं कि जीरो पावर कट की स्थिति बनी रहे। हालांकि, 7118 मेगावाट का आंकड़ा यह चेतावनी है कि आने वाले दिनों में यदि गर्मी और बढ़ी, तो संकट गहरा सकता है।


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