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Electricity demand देश में बिजली की अधिकतम मांग 250 गीगावाट: जानिए- राज्‍यों में बिजली की मांग और आपूर्ति में कितना अंतर

Khas Khabar

Electricity demand न्‍यूज डेस्‍क। भारत बिजली सरप्‍लस देश बन गया है। यहां बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर जीरो हो चुका है। यह दावा केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री श्रीपाद नाईक ने लोकसभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में किया गया है। विभिन्‍न राज्‍यों के करीब आधा दर्जन से ज्‍यादा सांसदों ने इस संबंध में सवाल किया था।

देश में बिजली की स्‍थापित उत्‍पादन क्षमता

देश की संस्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता 513.730 गीगावाट है। भारत सरकार ने अप्रैल, 2014 से अब तक 289.607 गीगावाट नई उत्पादन क्षमता जोड़कर बिजली की कमी की गंभीर समस्या का समाधान किया है, जिससे देश बिजली की कमी से निकलकर विद्युत पर्याप्तता वाला देश बन गया है।

देश में बिजली की उच्‍चतम मांग

देश ने गत वर्ष 250 गीगावाट की अब तक की सर्वाधिक उच्चतम मांग को सफलतापूर्वक पूरा किया है। ‘आपूर्ति की गई ऊर्जा’ और ‘ऊर्जा आवश्यकता’ के बीच का अंतर वित्त वर्ष 2022-23 में 0.5% से घटकर वर्तमान वर्ष में ‘शून्य’ हो गया है। इसी प्रकार, पूरी न हुई उच्चतम मांग वर्ष 2022-23 में 4.0% से घटकर वर्तमान वर्ष में लगभग ‘शून्य’ रह गई है।

निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास

जलविद्युत आधारित उत्पादन को इस प्रकार निर्धारित किया जा रहा है कि उच्च मांग अवधि की मांग को पूरा करने के लिए जल का संरक्षण किया जा सके।

उच्च मांग की अवधि के दौरान उत्पादन यूनिटों के नियोजित अनुरक्षण को न्यूनतम किया गया है।

ईंधन की कमी से बचने के लिए सभी तापविद्युत संयंत्रों को कोयले की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।

उच्च विद्युत मांग की अवधि में एनटीपीसी सहित अन्य उत्पादकों के गैस आधारित विद्युत संयंत्रों को शिड्यूल किया गया है।

सभी जेनको, जिनमें आईपीपी व केंद्रीय उत्पादन स्टेशन शामिल हैं, को नियोजित अनुरक्षण या मजबूरन कटौती की अवधि को छोड़कर दैनिक आधार पर पूर्ण उपलब्धता बनाए रखने के लिए परामर्श दिया गया है।

विद्युत अधिशेष क्षेत्रों से विद्युत अभाव वाले क्षेत्रों तक विद्युत अंतरण की सुगमता के लिए एक सुदृढ़ राष्ट्रीय ग्रिड की स्थापना की गई है। विद्युत उत्पादन एवं मांग में वृद्धि के अनुरूप राष्ट्रीय ग्रिड की क्षमता का निरंतर विस्तार किया जा रहा है।

निर्माणाधीन उत्पादन परियोजनाओं की निरंतर निगरानी की जा रही है ताकि अपेक्षित क्षमता का समय पर संवर्धन सुनिश्चित हो सके।

विद्युत बाजार में सुधार करते हुए पावर एक्सचेंजों में रीयल टाइम मार्केट (आरटीएम), ग्रीन डे अहेड मार्केट (जीडीएएम), ग्रीन टर्म अहेड मार्केट (जीटीएएम) तथा हाई प्राइस डे अहेड मार्केट (एचपी-डीएएम) जोड़े गए हैं। इसके अतिरिक्त, डिस्कॉम द्वारा अल्पकालिक विद्युत की खरीद के लिए दीप पोर्टल (किफायती विद्युत मूल्य की खोज) के माध्यम से ई-बिडिंग एवं ई-रिवर्स नीलामी की व्यवस्था की गई है।

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