Electricity rate रायपुर। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली की नई दर तय करने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी ने विद्युत नियामक आयोग को दिए टैरिफ प्रस्ताव पर उपभोक्ताओं से सुझाव और आपत्तियां मंगाई हैं। कंपनी ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए सकल राजस्व अंतर 6308.24 करोड़ रुपए बताया है।
राजस्व के अंतर की भरपाई के लिए वितरण कंपनी सभी उपभोक्ता श्रेणियों के टैरिफ में एक समान वृद्धि प्रस्तावित की गई है। टैरिफ याचिका में स्टील उद्योगों को ज्यादा से ज्यादा राहत देने पर जोर दिया गया है। सुझाव-आपत्तियों के बाद नियामक आयोग इस पर फरवरी में जनसुनवाई करेगा।
वितरण समेत अन्य कंपनियों ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के समक्ष वर्ष 2026-27 से वर्ष 2029-30 के लिए बहुवर्षीय सकल राजस्व आवश्यकता और वर्ष 2026-27 के लिए टैरिफ याचिका दायर की है। वितरण कंपनी की याचिका के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सकल राजस्व अंतर 6,308.24 करोड़ रुपए बताया गया है। इसमें वर्ष 2024-25 के वास्तविक खर्च (कैरिंग कॉस्ट) को भी समाहित किया गया है। जिसमें वर्ष 2026-27 के लिए कुल क्लोजिंग राजस्व अंतराल 5599.37 करोड़ आया है।
कंपनी की तरफ से 6308.24 करोड़ रुपए राजस्व अंतर की भरपाई के लिए सभी उपभोक्ता श्रेणियों के टैरिफ में एक समान वृद्धि प्रस्तावित की गई है। अग्रिम बिजली बिल भुगतान पर छूट, पिछले टैरिफ आदेश में दी गई 1.25 प्रतिमाह से घटाकर 0.5 प्रतिशत प्रतिमाह करने का अनुरोध किया गया है।
कंपनी की तरफ से दायर याचिका और प्रस्ताव पर उपभोक्ताओं को 21 दिनों के भीतर व्यक्तिगत रूप से अथवा डाक के जरिए सुझाव व आपत्तियां आमंत्रित किया गया है। यह सुझाव विद्युत नियामक आयोग दफ्तर शांतिनगर कार्यालय या कार्यपालक निदेशक (निका एवं उप्र) पावर कंपनी मुख्यालय डंगनिया के पते पर भेजना होगा।
बता दें कि विद्युत अपीलीय प्राधिकरण के आदेश के माध्यम से आयोग को वोल्टेजवार आपूर्ति लागत के आधार पर खुदरा दर निर्धारित करने का निर्देश दिया गया है। ऐसे में आयोग वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा शुल्क का निर्धारण वोल्टेजवार आपूर्ति लागत के आधार पर करेगा। आयोग को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए वोल्टेज के अनुसार आपूर्ति लागत के आधार पर टैरिफ निर्धारित करना बाध्यकारी है।
कंपनी प्रबंधन द्वारा वर्ष 2024-25 के टैरिफ आदेश में अनुमोदित किए गए लोड फैक्टर रिबेट अनुसार स्टील उद्योग श्रेणी के उपभोक्ताओं को दिए जा रहे 25 प्रतिशत लोड फैक्टर रिबेट को घटाकर 10 प्रतिशत करने का अनुरोध किया गया है।
इसी तरह स्टील उद्योग के लिए टाइम ऑफ डे (टीओडी) टैरिफ को सौर घंटों (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) के दौरान वर्तमान सामान्य अवधि के टैरिफ को 80 प्रतिशत से घटाकर 70 प्रतिशत करने और उच्चतम मांग अवधि (शाम 5 बजे से 11 बजे) के दौरान टैरिफ को 120 प्रतिशत से बढ़ाकर 125 प्रतिशत करने का आग्रह किया गया है।
दूसरी ओर, लोड फैक्टर रिबेट गणना के लिए 132 केवी और 220 केवी सिस्टम से जुड़े स्टील उद्योग उपभोक्ताओं को दिये जा रहे 3 घंटे के पावर ऑफ ऑवर्स को समाप्त करने का प्रस्ताव दिया गया है। वहीं आदिवासी क्षेत्र के स्टील उद्योगों के लिए ऊर्जा प्रभार में 5 प्रतिशत रिबेट का प्रस्ताव आयोग को कंपनी ने दिया है।