
Employees’ Union रायपुर। लघु वेतन चतुर्थ कर्मचारी संघ, छत्तीसगढ़ द्वारा दिनांक 13.10.2025 को एक विस्तृत ज्ञापन प्रमुख सचिव विधि एवं विधाई विभाग छत्तीसगढ़ शासन को सौंपा गया था, जिसमें स्पष्ट रूप से उल्लेखित किया गया था कि आकस्मिक निधि नियम और सीधी भर्ती संबंधी प्रावधानों के अनुसार प्रथम तीन वर्ष तक कलेक्टर दर, उसके बाद नियमित वेतनमान और वार्षिक वेतन वृद्धि प्रदान किए जाने के नियमों की गलत व्याख्या कर अनेक जिलों में कर्मचारियों को वैधानिक लाभ से वंचित किया जा रहा था।
chaturpost.com के WhatsApp से जुड़ने के लिए यहां क्लिक करें: कृपया चैलन पर जाने के बाद ऊपर दिख रहे फोलो को प्रेस जरुर करें
लघु वेतन चतुर्थ कर्मचारी संघ, छत्तीसगढ़ के प्रांतीय महामंत्री योगेश चौरे ने बताया कि विशेष रूप से बस्तर संभाग बस्तर कोंडागांव नारायणपुर सुकमा दंतेवाड़ा कांकेर, बालोद के साथ ही प्रदेश के अन्य जिलों में यह मुद्दा अधिक गम्भीर रूप से सामने आया था, जिसकी संपूर्ण जानकारी ज्ञापन में संलग्न की गई थी।
साथ ही रतन कश्यप प्रकरण (WPS No. 2603/2022, दिनांक 13/04/2022) का उल्लेख करते हुए यह मांग की गई थी कि नियमों की गलत व्याख्या के कारण किसी भी कर्मचारी का वैधानिक हक प्रभावित न हो।

प्रांतीय महामंत्री योगेश चौरे ने बताया कि संघ के ज्ञापन पर कार्रवाई करते हुए विधि एवं विधायी कार्य विभाग, छत्तीसगढ़ शासन ने 05 दिसंबर 2025 के माध्यम से स्पष्ट निर्देश आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग, मंत्रालय (नवा रायपुर) को जारी किए हैं। यह निर्देश 13.10.2025 के हमारे ज्ञापन पर औपचारिक और ठोस प्रतिक्रिया है।
05 दिसंबर को संघ के महामंत्री योगेश चौरे की चर्चा विधि विभाग के अवर सचिव से टेलीफोन पर हुई, जिसमें उन्होंने पुष्टि की कि संघ का ज्ञापन विधिवत परीक्षण में लिया गया है, और उसी दिन शाम तक संपूर्ण फाइल छत्तीसगढ़ शासन आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के सचिव के कार्यालय को भेज दी गई है।
chaturpost.com के WhatsApp ग्रुप से जुड़ने के लिए यहां क्लिक करें
इसके बाद 10 दिसंबर 2025 को इस फाइल की प्रति संघ के तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को उपलब्ध कराई गई। प्रतिनिधिमंडल में योगेश चौरे प्रांतीय महामंत्री, सुरेश ढिंढी और रायपुर जिला युवा मोर्चा अध्यक्ष राकेश ठाकुर सम्मिलित थे।
प्रतिनिधिमंडल ने मंत्रालय स्थित आदिम जाति व अनुसूचित जाति विकास विभाग में अवर सचिव सरोजिनी टोप्पो से लगभग एक घंटे की विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि विधि विभाग द्वारा भेजा गया प्रकरण उनके विभाग में प्राप्त हो चुका है, संघ के ज्ञापन में उठाए गए सभी बिंदुओं की विधिक परीक्षण प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है, तथा आदेश जारी करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।
chaturpost.com के WhatsApp ग्रुप से जुड़ने के लिए यहां क्लिक करें
संघ ने विभाग का आभार व्यक्त किया। संघ की स्पष्ट सलाह है कि वर्तमान में न्यायालय जाना आवश्यक नहीं कुछ कर्मचारियों द्वारा यह भ्रम फैलाया जा रहा था कि इस मामले में कार्रवाई नहीं हो रही, इसलिए न्यायालय जाना पड़ेगा। संघ स्पष्ट करता है कि वर्तमान स्थिति में न्यायालय में याचिका दायर करना आवश्यक नहीं है। शासन स्तर पर विभागीय प्रक्रिया सक्रिय एवं अंतिम चरण में है।
यह भी पढ़ें- छत्तीसगढ़ में 2026 के शासकीय अवकाश की घोषणा: GAD ने जारी की सूची
संघ के लिए न्यायालय के दरवाजे सदैव खुले हैं, किंतु जब शासन स्तर पर कार्रवाई प्रगति पर है तो न्यायालय जाना उचित नहीं। संघ की प्रतिबद्धता लघु वेतन चतुर्थ कर्मचारी संघ यह सुनिश्चित करेगा कि आकस्मिक निधि नियम, कलेक्टर दर, नियमित वेतनमान, वार्षिक वेतन वृद्धि, तथा रतन कश्यप प्रकरण में उच्च न्यायालय के निर्देश सभी जिलों में एक समान और सही तरीके से लागू हों।



