EOW-ACB रायपुर। छत्तीसगढ़ में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान हुए कथित शराब घोटाला में आर्थिक अपराध अन्वेष्ण ब्यूरो (EoW) ने आज रायपुर की विशेष कोर्ट में नौंवा आरोप पत्र दाखिल किया। इसमें ईओडब्ल्यू ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल पर आरोप लगाया है।
EoW के अफसरों ने बताया कि अब तक इस प्रकरण में मूल चार्जशीट सहित कुल 08 अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किए जा चुके हैं। प्रस्तुत चालान में अब तक गिरफ्तार किए गए आरोपियों के संबंध में जांच की वर्तमान स्टेटस Current status को भी प्रस्तुत किया गया है, साथ ही अब तक गिरफ्तार सभी आरोपियों के संबंध में डिजिटल एविडेंस Digital evidence की रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई है। इसके अतिरिक्त जिन आरोपियों के संबंध में जांच जारी है, उनके संबंध में भी जांच की वर्तमान स्थिति का उल्लेख किया गया है। प्रकरण की विवेचना कार्यवाही निरंतर जारी है।
जांच एजेंसी के अनुसार जांच में अभियुक्त चैतन्य बघेल की भूमिका तत्कालीन समय में आबकारी विभाग में वसूली तंत्र (सिंडिकेट) को खड़ा करने और उसके समन्वय एवं संरक्षक के रूप में पाई गई है। चैतन्य बघेल प्रशासनिक स्तर पर सिंडिकेट के हितों के हिसाब से काम करने वाले अनिल टुटेजा, सौम्या चैरसिया, अरुणपति त्रिपाठी, निरंजन दास जैसे अधिकारियों और सिंडिकेट के जमीनी मुखिया Anwar Dhebar,अनवर ढेबर, अरविंद सिंह, विकास अग्रवाल Vikas Agarwal जैसे लोगों के बीच परस्पर सामंजस्य और तालमेल बिठाने और उन्हें निर्देशित करने का काम करते थे।
ईओडब्ल्यू के अनुसार चैतन्य बघेल और अनवर ढेबर के टीम के द्वारा एकत्र की गई घोटाले की रकम The scam amount को अपने भरोसेमंद लोगों के माध्यम से उच्चस्तर तक पहुंचाने और उसकों व्यवस्थापित arrange करने का काम कर रहे थें। चैतन्य बघेल ने त्रिलोक सिंह ढिल्लन Trilok Singh Dhillon के विभिन्न फर्मो में, अपने हिस्से की रकम को प्राप्त कर बैंकिंग चैनल Banking channel के माध्यम से अपने पारिवारिक फर्मों में प्राप्त किया, और उसका उपयोग निर्माणाधीन रियल इस्टेट Real Estate परियोजनाओं में किया। इसके अलावा बड़ी मात्रा में अपने पारिवारिक मित्रों, सहयोगियों के जरिये घोटाले की रकम बैंकिंग चैनल के माध्यम से प्राप्त कर उसका निवेश आदि करना पाया गया है।
उच्चस्तर पर घोटाले की रकम के प्रबंधन के साथ-साथ, लगभग 200 से 250 करोड़ रुपए अपने हिस्से में प्राप्त करने के साक्ष्य मिले है। अब तक की गई विवेचना पर यह स्पष्ट हुआ है कि अभियुक्त चैतन्य बघेल से सिंडिकेट को मिलने वाले उच्चस्तरीय संरक्षण, नीतिगत/प्रशासनिक हस्तक्षेप और प्रभाव के कारण लंबे समय तक इस अपराध को अंजाम दिया जा सका। अद्यतन स्थिति में जांच में, गणना के आधार पर आबकारी घोटाले की रकम लगभग 3074 करोड़ रुपए का होना पाया गया है, लेकिन अग्रिम जांच पर समग्र स्त्रोतों से इस अवैध रकम के 3500 करोड़ रुपए से अधिक पहुंचने की संभावना है।