Govind Dev Giri  स्वामी गोविंद देव गिरि का बड़ा बयान: मथुरा में श्रीकृष्‍ण के विराजने और भारत हिंदू लेकर कह दी बड़ी बात…

schedule
2026-01-31 | 14:02h
update
2026-01-31 | 14:02h
person
chaturpost.com
domain
chaturpost.com

Govind Dev Giri  रायपुर। भारत हिंदू राष्ट्र था, है और हमेशा हिंदू राष्ट्र ही रहेगा। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि शासन इसे हिंदू राष्ट्र घोषित करें या न करें। हिंदू राष्ट्र का अर्थ है कि सभी को अपनी-अपनी उपासना का अधिकार। यह बातें शनिवार को स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने कही। यहां राजधानी रायपुर के वीआईपी रोड स्थित एक होटल में आयोजित नवधा भक्ति कथा में आए हुए हैं। एक प्रश्न का उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराना बहुत ही गलत बात है और ऐसा करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

मथुरा में जल्‍द विराजेगें श्रीकृष्ण

 स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के संबंध में पूछे गए सवाल पर स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने कहा कि मैं उन्हें शंकराचार्य नहीं मानता। इन लोगों की सारी बातें राजनीति से प्रेरित रहती है। उन्होंने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद वही है जिन्होंने राम मंदिर के निर्माण के समय भी विरोध किया था। स्वामी जी ने कहा कि जिस प्रकार अयोध्या में भगवान श्रीराम विराजे है, उसी प्रकार जल्द ही मथुरा में भगवान श्री कृष्ण भी विराजित होंगे।

शिक्षा में स्किल की कमी

एक सवाल का जवाब देते हुए स्वामी जी ने कहा कि आज की शिक्षा व्यवस्था में स्किल की कमी है। शिक्षा के साथ ही स्किल पर ध्यान देना जरूरी है। इसके साथ ही आज की युवा पीढ़ी में संस्कारों की कमी आती जा रही है,अपनी संस्कृति व संस्कार की शिक्षा देना भी बहुत ही ज्यादा जरूरी है। 

ज्ञान से भी ज्यादा महत्व भक्ति का है

स्वामी जी ने ज्ञान से भी ज्यादा महत्व भक्ति का होता है। भगवान भी उन्हीं को मिलते है जो पूर्ण प्रेम व भक्ति के साथ ईश्वर को पुकारते है। भक्ति के साथ ही किसी भी प्रकार से राजनीति करना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि राजनीति को किसी भी प्रकार से अध्यात्म से नहीं जोड़ना चाहिए।

नवधा भक्ति कथा का केंद्र नवविधा भक्ति है

नवधा भक्ति कथा को विस्तृत रूप से समझाते हुए स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने कहा कि भक्ति के नौ पवित्र रूप, जिन्हें भगवान राम ने रामायण में शबरी को और भक्त प्रह्लाद ने श्रीमद्भभागवत में बताए हैं। इन भक्ति मार्गों में शामिल हैं श्रवण (सुनना), कीर्तन (गान), स्मरण (स्मृति), सेवाश्रवण (सेवा), अर्चन (पूजा भाव), वंदन (नमन भाव), दास्य (सेवक भाव), सख्य (मित्र भाव) और आत्म-निवेदन (पूर्ण समर्पण का भाव)।

 ये मार्ग मनुष्य को सच्चे कर्म और अंतर्मन के समर्पण के माध्यम से आध्यात्मिक मुक्ति की ओर ले जाते हैं। नवधा भक्ति की नौ श्रेणियों जैसे श्रवण, कीर्तन, स्मरण इत्यादि के  माध्यम से यह समझाया जाता है कि ईश्वर के प्रति हमारा समर्पण किन-किन रूपों में प्रकट हो सकता है। भगवान की भक्ति का कोई एकमात्र मार्ग नहीं होता।  भक्ति के अनेक माध्यमों से ईश्वर की प्राप्ति हो सकती है। यही भाव नवधा भक्ति कथा में प्रभु श्रीराम द्वारा व्यक्त किया गया है।

जानिए- कौन हैं स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज

स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज को स्‍वामीजी के नाम से जाना जाता है, वे अयोध्‍या स्थित श्रीराम जन्‍म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्‍ट के कोषाध्‍यक्ष हैं। इसके साथ ही वे मथुरा में श्रीकृष्‍ण जन्‍मभूमि ट्रस्‍ट में भी शामिल हैं। स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज वहां उपाध्‍यक्ष हैं।

chatur postJanuary 31, 2026
119 2 minutes read
Follow Us
Imprint
Responsible for the content:
chaturpost.com
Privacy & Terms of Use:
chaturpost.com
Mobile website via:
WordPress AMP Plugin
Last AMPHTML update:
25.02.2026 - 09:32:32
Privacy-Data & cookie usage: