
High Court रायपुर। पेंशनरों से जुड़े एक मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने तीन सरकारों को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है। जबलपुर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के साथ ही मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकार को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर को होगी।
पेंशनर्स महासंघ के छत्तीसगढ़ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र नामदेव ने यह जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के लिए वर्ष 2000 में मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम बनाया गया था। इसमें दोनों राज्यों के बीच परिसंपत्तियों, कर्मचारियों के बंटवारा समेत अन्य बातों को शामिल किया गया था।
High Court इसी अधिनियम की धारा 49(6) पेंशनर्स से संबंधित है। इस धारा के कारण पेंशनर्स का महंगाई भत्ता बढ़ाने के लिए दोनों राज्यों की आपसी सहमति जरुरी होती है। इसकी वजह से पेंशनर्स को समय पर डीए समेत अन्य लाभ नहीं मिल पाता है। राज्य बने 25 साल हो गया है, ऐसे में अब इस धारा को समाप्त करने की मांग लगातार की जा रही थी, लेकिन राज्य सरकारें इसे संसद से पारित अधिनियम बता कर अपना पल्ला झाड़ लेती हैं।
इसे देखते हुए जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49 (6) के अंतर्गत उत्तरवर्ती राज्य मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के पेंशनरों को महंगाई राहत देने के पूर्व आपस में ली जा रही सहमति को चुनौती दी गई है। जबलपुर हाईकोर्ट में जस्टिस विवेक जैन की कोर्ट में 23 जुलाई को इसकी सुनवाई हुई। जस्टिस जैन ने इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ सरकार को भी नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई की तारीख 8 सितंबर 2025 नियत किया गया है। प्रकरण पर पैरवी अधिवक्ता कपिल शर्मा द्वारा की जा रही है।
High Court जारी विज्ञप्ति में कर्मचारी नेता वीरेन्द्र नामदेव ने आगे बताया है कि इस धारा 49 की गलत व्याख्या की वजह से छत्तीसगढ़ में लगभग डेढ़ लाख और मध्यप्रदेश के साढ़े पांच लाख पेंशनर्स लगभग 24 वर्षों से महंगाई राहत (डीआर) में केन्द्र सरकार के समान घोषित आर्थिक लाभ प्राप्त करने से वंचित है और दोनों राज्यों में पेंशनर संगठन लगातार धारा 49 को विलोपित कर केन्द्र सरकार के समान महंगाई राहत देने की मांग कर रहे हैं।




