High Court बिलासपुर। Chhattisgarh हाईकोर्ट ने संविदा कर्मियों को बड़ी राहत दी है। हालांकि कोर्ट Court ने यह फैसला स्कूल शिक्षा विभाग के संदर्भ में दिया है, लेकिन इसका असर दूसरे विभागों में काम कर रहे संविदा Contract कर्मियों पर भी पड़ सकता है।
कोर्ट ने दो डाटा एंट्री Data Entry ऑपरेटरों को नियमित नियुक्ति देने का आदेश दिया है। जस्टिस एके प्रसाद Justice AK Prasad ने अपने फैसले में कहा है, एक आदर्श नियोक्ता के रूप में राज्य का दायित्व है कि वह अपने कर्मचारियों के साथ निष्पक्ष व्यवहार करे, चाहे उनकी नियुक्ति संविदात्मक contractual हो या नियमित।
हंस कुमार रजवाड़े और जय प्रकाश चौहान ने Bilaspur हाई कोर्ट में याचिका दाखिल किया था। दोनों ने अपने वकील Advocate के माध्यम से उन्होंने विभाग के 25 अक्टूबर 2022 के एक आदेश को चुनौती दिया था। इस आदेश में विभाग ने दोनों की नियुक्तियों को नियमित Regular नियुक्तियां मानने से इन्कार करते हुए संविदा नियुक्ति बताया था।
साल 2012 में एक संयुक्त विज्ञापन Joint advertising के जरिये विभिन्न श्रेणी तृतीय और चतुर्थ पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित किया था। विज्ञापन में डेटा एंट्री Data Entry ऑपरेटर का पद भी शामिल था।
जनजातीय कल्याण विभाग Tribal Welfare Department के अंतर्गत ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों BEO के कार्यालयों के लिए डेटा एंट्री ऑपरेटर data entry operator के उक्त पद पहले से ही नियमित आधार पर स्वीकृत थे।
याचिकाकर्ताओं petitioners ने कोर्ट को बताया कि जिस समय यह विज्ञापन जारी किया उस वक्त राज्य में नियमित भर्ती Regular recruitment पर लगा प्रतिबंध (18 सितंबर 2007 का आदेश) हटा दिया गया था। ऐसे में वित्त विभाग Finance Department से परामर्श किए बिना इन पदों पर नियमित भर्ती की अनुमति मिल गई थी।
नियमित रूप से स्वीकृत किए जाने और नियमित भर्ती पर लगे प्रतिबंध को हटाए जाने के बाद भी विज्ञापन में डेटा एंट्री ऑपरेटर data entry operator के पदों को संविदात्मक बताया गया था। petitioners को इस बात की जानकारी नहीं थी, इसलिए उन्होंने चयन प्रक्रिया में भाग लिया और विधिवत चयन होने पर वर्ष 2012-2013 में निश्चित वेतन पर नियुक्त किए गए।
याचिकाकर्ताओं ने Court को बताया कि उनकी नियुक्ति आदेशों में दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि का प्रावधान था, जो आमतौर पर नियमित Regular नियुक्तियों पर लागू होने वाली शर्त है। 10 वर्षों से अधिक समय की सेवा के बाद दोनों ने 21 जनवरी 2022 को अभ्यावेदन प्रस्तुत कर नियमित नियुक्ति की मांग की।
सुनवाई के बाद राज्य सरकार ने 25 अक्टूबर 2022 को दोनों के अभ्यावेदनों को खारिज कर दिया गया। साथ ही नियुक्ति संविदात्मक contractual रहने की जानकारी दी गई।
Bilaspur Highcourt कोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया। इसमें कोर्ट ने सरकारके 25 अक्टूबर 2022 के आदेश रद्द कर दिया है। साथ ही सभी याचिकाकर्ताओं petitioners की सेवाओं को उन स्वीकृत पदों के विरुद्ध नियमित Regular करें करने का आदेश दिया।