शिक्षा

Higher Education छत्तीसगढ़ में बिना टेंडर के खरीदी के चक्कर में निपट गए तीन प्राचार्य: विभाग ने जारी किया निलंबन आदेश

Higher Education रायपुर। छत्तीसगढ़ में तीन प्राचार्य पर निलंबिन की कार्यवाही की गई है। मामला बिना टेंडर के करोड़ों रुपए की खरीदी का है। इस मामले में प्रारंभिक स्तर पर नियमों के उल्लंघन के दोषी पाए गए प्राचार्य व एक अधिकारी को सरकार ने निलंबित कर दिया है।

उच्च शिक्षा विभाग की कार्यवाही

मामला उच्च शिक्षा विभाग का है। विभाग में सरकारी खरीदी नियमों के उल्लंघन से जुड़े गंभीर प्रकरणों पर लगातार त्वरित और कठोर कार्यवाही की जा रही है। विश्वविद्यालयों और सरकारी महाविद्यालयों में बिना निविदा प्रक्रिया अपनाए करोड़ों रुपए की खरीदी किए जाने की शिकायत विभिन्न माध्यम से प्राप्त हुई थी। विभागीय जांच में भी यह बात सामने आई कि कुछ विश्वविद्यालयों और सरकारी महाविद्यालयों ने बिना निविदा प्रक्रिया अपनाए बड़े पैमाने पर खरीदी का आदेश जारी किया है।

बिलासपुर और नारायणपुर का मामला

उच्च शिक्षा विभाग के अफसरों ने बताया कि बिलासपुर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय ने 15 अप्रैल 2025 को एक ही दिन में 26 खरीदी के आर्डर जारी किए गए। इसकी कीमत लगभग एक करोड़ रुपए थी। यह आर्डर बिना टेंडर के जारी किए गए थे।

 इसी तरह नारायणपुर के शासकीय बोरणा सनातन संस्कृत आदर्श महाविद्यालय ने 14 अक्टूबर 2025 को एक ही दिन में 35 लाख रुपये के 22 खरीदी आर्डर जारी किया गया। महासमुंद के शासकीय आदर्श महाविद्यालय, लोहारकोट महासमुंद ने 22 अक्टूबर 2025 को 1 करोड़ रुपये मूल्य के खरीदी के 36 आदेश बिना टेंडर जारी किए गए।

अपर संचालक ने की जांच

शिकायत मिलने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने 28 नवंबर 2025 को अपर संचालक की अध्यक्षता में जांच समिति का गठित की। समिति की रिपोर्ट के आधार पर शासकीय आदर्श महाविद्यालय लोहारकोट महासमुंद के प्राचार्य और क्रय समिति के सदस्यों को निलंबित कर दिया गया है।

वहीं, बिलासपुर के अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय और नारयणपुर के बोरणा सनातन संस्कृत आदर्श महाविद्यालय के प्रकरणों में भी कार्यवाही के तहत प्राचार्य सहित 4 सहायक प्राध्यापकों को निलंबित किया गया है।

नियमों का पालन सुनिश्वित करने के निर्देश

     उच्च शिक्षा आयुक्तालय ने स्पष्ट किया है कि शासकीय खरीदी नियमों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। यह मामला प्रदेश में उच्च शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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