रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और आस-पास के औद्योगिक क्षेत्रों में पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले उद्योगपतियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने अब तक की सबसे बड़ी और सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। मंडल की इस ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ से उरला और सिलतरा जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में हड़कंप मच गया है।
चतुरपोस्ट इनपुट: सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ समय से स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं द्वारा लगातार वायु और जल प्रदूषण की शिकायतें मिल रही थीं। मंडल ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया था, जिसने गुप्त रूप से इन उद्योगों का निरीक्षण किया।
30 उद्योगों के ‘चिमनी‘ पर ताला, बिजली कटी
मंडल द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, जल एवं वायु प्रदूषण निवारण अधिनियमों के तहत की गई इस व्यापक कार्रवाई में अब तक 30 उद्योगों को तत्काल प्रभाव से उत्पादन बंद करने (Closure Order) का आदेश दिया गया है। इतना ही नहीं, बिजली विभाग को इन इकाइयों के विद्युत कनेक्शन भी विच्छेदन करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
ये बड़े नाम भी आए चपेट में
जनवरी 2026 से जारी इस अभियान में अब तक 23 उद्योगों को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किए जा चुके हैं। इनमें कई बड़े और रसूखदार नाम भी शामिल हैं, जो अब तक मंडल की रडार से बचते आ रहे थे:
वासवानी इंडस्ट्रीज लिमिटेड (उरला)
शिल्फी स्टील्स प्रा. लिमिटेड (सिलतरा)
एसकेएस इस्पात एंड पावर लिमिटेड (सिलतरा)
सारडा एनर्जी मिनरल्स लिमिटेड: इस प्रमुख कंपनी के खिलाफ बिना अनुमति के ‘फ्लाई ऐश’ (राख) की डम्पिंग करने के मामले में गंभीर नोटिस जारी किया गया है।
लाखों का जुर्माना, सुधार नहीं तो ‘नो एंट्री‘
मंडल ने केवल फैक्ट्रियां ही बंद नहीं की हैं, बल्कि 13 उद्योगों पर कुल 28 लाख 92 हजार रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति (Environmental Compensation) भी अधिरोपित की है। मंडल ने दोटूक शब्दों में कहा है कि जब तक ये उद्योग सभी पर्यावरणीय मानकों, वैधानिक प्रावधानों और सम्मति शर्तों का 100% अनुपालन सुनिश्चित नहीं करते, तब तक उन्हें दोबारा संचालन की अनुमति कदापि नहीं दी जाएगी।
चतुरपोस्ट का नज़रिया
यह कार्रवाई स्वागत योग्य है। रायपुर लंबे समय से देश के सबसे प्रदूषित शहरों में गिना जाता रहा है। मंडल की यह सख्ती न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी है, बल्कि उन लाखों लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी जो इन उद्योगों के आस-पास जहरीली हवा और पानी के बीच जीने को मजबूर हैं। उम्मीद है कि यह कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित न रहकर, जमीन पर बदलाव लाएगी।

