रायपुर। मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और इजरायल-ईरान के बीच युद्ध जैसे हालात ने भारतीय पर्यटकों के समर वेकेशन प्लान को पूरी तरह बदल दिया है। जो लोग इस गर्मी में यूरोप या खाड़ी देशों की सैर का सपना देख रहे थे, वे अब सुरक्षा कारणों से अपनी बुकिंग कैंसिल करा रहे हैं। इसका सीधा फायदा घरेलू पर्यटन (Domestic Tourism) को मिल रहा है, जहां बुकिंग के आंकड़ों ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
विदेशी टूर पैकेज में 90 फीसदी की भारी गिरावट
पर्यटन विशेषज्ञों के अनुसार, मार्च महीने में विदेशी यात्राओं की मांग में करीब 90% की गिरावट दर्ज की गई है। अप्रैल और मई के लिए जो बुकिंग पहले हो चुकी थी, लोग अब उन्हें भी कैंसिल कर रहे हैं। न केवल घूमने जाने वाले, बल्कि पढ़ाई और नौकरी के सिलसिले में विदेश जाने की तैयारी कर रहे युवाओं ने भी फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपनाई है।
व्यास हॉलीडेज के संचालक कीर्ति व्यास के मुताबिक, “पर्यटकों के मन में डर है कि अगर युद्ध की स्थिति बिगड़ी और वे विदेश में फंस गए, तो वापसी मुश्किल हो जाएगी। कोरोना काल के बाद यह दूसरा बड़ा मौका है जब विदेशी पर्यटन पूरी तरह ठप नजर आ रहा है।”
पहाड़ों और तीर्थ स्थलों की ओर मुड़े पर्यटक
विदेश न जा पाने की कसर अब देश के भीतर पूरी की जा रही है। ट्रैवल एजेंटों के पास शिमला, मनाली, नैनीताल, ऊंटी और दार्जिलिंग जैसे ठंडे प्रदेशों के लिए जबरदस्त इंक्वायरी आ रही है। इसके अलावा:
- धार्मिक पर्यटन: चारधाम यात्रा (केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री, गंगोत्री) और नौ देवी दर्शन के लिए रिकॉर्ड तोड़ एडवांस बुकिंग हो रही है।
- राजस्थान: ऐतिहासिक किलों और संस्कृति को देखने के लिए भी घरेलू सैलानी रुचि दिखा रहे हैं।
- स्थानीय पर्यटन: लोग भीड़भाड़ से बचकर अपने ही राज्य के ऑफ-बीट डेस्टिनेशंस को प्राथमिकता दे रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के लिए अच्छी खबर: 31 मार्च से शुरू होगी जगदलपुर-रायपुर फ्लाइट
बस्तर के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। एलायंस एयर (Alliance Air) ने समर शेड्यूल के तहत 31 मार्च से रायपुर-जगदलपुर रूट पर विमान सेवा फिर से शुरू करने का निर्णय लिया है।
यह फ्लाइट हैदराबाद-जगदलपुर-रायपुर को आपस में जोड़ेगी। लंबे समय से बंद पड़ी इस सेवा के शुरू होने से बस्तर आने वाले पर्यटकों को अब सड़क या रेल मार्ग की लंबी और थकान भरी यात्रा नहीं करनी होगी। इससे छत्तीसगढ़ के स्थानीय पर्यटन व्यवसाय को बड़ी संजीवनी मिलने की उम्मीद है।
निष्कर्ष: सुरक्षा बनी पहली प्राथमिकता
साल 2022 में सामान्य हुए पर्यटन उद्योग को इस युद्ध ने एक बार फिर झटका दिया है, लेकिन भारतीय घरेलू बाजार के लिए यह एक अवसर की तरह उभरा है। सुरक्षित और सुलभ यात्रा की तलाश में पर्यटक अब ‘देखो अपना देश’ की राह पर चल पड़े हैं।
प्रकृति का खजाना है छत्तीसगढ़: गर्मी की छुट्टियों के लिए बेस्ट हैं राज्य के ये 5 शानदार टूरिस्ट स्पॉट्स
जब बात पर्यटन की आती है, तो अक्सर लोगों का ध्यान शिमला या मनाली की ओर जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि छत्तीसगढ़ में भी ऐसी जगहें हैं जिन्हें ‘भारत का नियाग्रा’ और ‘छत्तीसगढ़ का तिब्बत’ कहा जाता है? हाल ही में रायपुर-जगदलपुर हवाई सेवा शुरू होने के फैसले के बाद अब राज्य के भीतर पर्यटन और भी सुलभ हो गया है।
1. चित्रकोट जलप्रपात: भारत का नियाग्रा (बस्तर)
बस्तर जिले में स्थित चित्रकोट जलप्रपात देश का सबसे चौड़ा झरना है। इंद्रावती नदी पर स्थित यह जलप्रपात अपनी भव्यता के कारण दुनिया भर में प्रसिद्ध है। मानसून में इसका रूप रौद्र होता है, लेकिन गर्मियों में भी इसकी दूधिया धारा और आसपास की हरियाली सुकून देती है।
2. मैनपाट: छत्तीसगढ़ का शिमला (सरगुजा)
अगर आप पहाड़ों और ठंडी हवाओं के शौकीन हैं, तो मैनपाट आपके लिए परफेक्ट है। इसे ‘छत्तीसगढ़ का तिब्बत’ भी कहा जाता है। यहाँ का ‘उल्टा पानी’ और ‘दलदली’ (हिलती हुई जमीन) पर्यटकों के बीच मुख्य आकर्षण का केंद्र है।
3. तीरथगढ़ जलप्रपात: कुदरत का करिश्मा
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में स्थित तीरथगढ़ जलप्रपात अपनी सीढ़ीनुमा बनावट के लिए जाना जाता है। लगभग 300 फीट की ऊंचाई से गिरता पानी ऐसा लगता है मानो दूध की चादर बिछी हो।
4. सतरेंगा: छत्तीसगढ़ का नया ‘गोवा’ (कोरबा)
कोरबा जिले का सतरेंगा अब एक बड़े टूरिस्ट हब के रूप में उभरा है। हसदेव नदी के किनारे स्थित इस जलाशय में आप क्रूज राइड, बोटिंग और वॉटर स्पोर्ट्स का आनंद ले सकते हैं।
5. भोरमदेव मंदिर: छत्तीसगढ़ का खजुराहो (कवर्धा)
इतिहास और वास्तुकला प्रेमियों के लिए भोरमदेव मंदिर किसी स्वर्ग से कम नहीं है। 11वीं शताब्दी का यह मंदिर अपनी बारीक नक्काशी और प्राचीन सुंदरता के लिए जाना जाता है।
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