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IAS रजत बंसल बने छत्तीसगढ़ के नए जनसंपर्क आयुक्त; जानें बस्तर में उनके चर्चित नवाचार और पूरा प्रोफाइल

Rajat bansal

IAS रायपुर। बस्तर कलेक्टर के रूप में रजत बंसल का कार्यकाल अपनी ‘इनोवेटिव और विजनरी’ कार्यशैली के लिए काफी चर्चित रहा है। उन्होंने बस्तर की छवि को केवल एक संवेदनशील क्षेत्र से बदलकर एक ‘उभरते हुए ब्रांड’ के रूप में स्थापित करने के लिए कई नवाचार किए।

बस्तर में रजत बंसल के प्रमुख नवाचार (Key Innovations)

थिंक-बी‘ (Think-B) स्टार्टअप इन्क्यूबेशन सेंटर:

बस्तर के युवाओं में उद्यमिता (Entrepreneurship) को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने ‘Think-B’ (Technology Hub and Innovation Network of Bastar) की शुरुआत की। इसका उद्देश्य स्थानीय युवाओं, कारीगरों और किसानों को स्टार्टअप के जरिए राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मार्केट से जोड़ना था। इसके लिए उन्होंने TISS मुंबई के साथ हाथ मिलाया।

1. ‘थिंक-बी’ (Think-B): बस्तर के युवाओं के लिए ‘स्टार्टअप हब’

पूरा नाम: Technology Hub and Innovation Network of Bastar (Think-B)

उद्देश्य: बस्तर के आदिवासी युवाओं के पास हुनर तो था, लेकिन बाजार की समझ नहीं थी। ‘थिंक-बी’ का लक्ष्य उन्हें ‘नौकरी खोजने वाले’ के बजाय ‘नौकरी देने वाला’ (Entrepreneur) बनाना था।

नवाचार: इसके लिए जगदलपुर के शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज में एक अत्याधुनिक इन्क्यूबेशन सेंटर बनाया गया।

साझेदारी: प्रशासन ने TISS (टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस) मुंबई और IIT/IIM के विशेषज्ञों के साथ एमओयू (MoU) किया, ताकि स्थानीय युवाओं को विश्वस्तरीय मेंटरशिप मिल सके।

परिणाम: वनोपज (जैसे महुआ, इमली), हस्तशिल्प और कृषि क्षेत्र में काम करने वाले कई स्थानीय स्टार्टअप्स को यहाँ से फंडिंग और ब्रांडिंग मिली। इसने बस्तर की छवि ‘नक्सल प्रभावित’ से बदलकर ‘इनोवेशन हब’ की कर दी।

बस्तर कॉफी प्रोजेक्ट (Bastar Coffee): दरभा का कायाकल्प

यह प्रोजेक्ट रजत बंसल के सबसे सफल कृषि प्रयोगों में से एक माना जाता है।

शुरुआत: बस्तर के दरभा ब्लॉक में, जो कभी बेहद संवेदनशील इलाका माना जाता था, वहां की जलवायु और मिट्टी के परीक्षण के बाद कॉफी की खेती शुरू कराई गई।

विशेषता: यहाँ मुख्य रूप से अरेबिका’ (Arabica) और रोबस्टा’ (Robusta) किस्म की कॉफी उगाई गई।

ब्रांडिंग: ‘बस्तर कैफे’ (Bastar Cafe) के नाम से जगदलपुर में आउटलेट्स खोले गए। रजत बंसल ने व्यक्तिगत रुचि लेकर इसकी ब्रांडिंग दिल्ली और रायपुर के बड़े आयोजनों में कराई।

प्रभाव:  आर्थिक: धान की तुलना में कॉफी से किसानों की आय कई गुना बढ़ गई।

युवोदय‘ (Yuvoday) स्वयंसेवक अभियान:

समाज सेवा और शासन के बीच की दूरी कम करने के लिए उन्होंने ‘युवोदय’ नाम से एक वॉलंटियर नेटवर्क खड़ा किया। इसमें लगभग 7,000 से अधिक युवा स्वेच्छा से स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण जैसे सामाजिक अभियानों में प्रशासन की मदद के लिए जुड़े।

आमचो बस्तरऔर पर्यटन ब्रांडिंग:

उन्होंने ‘आमचो बस्तर’ (हमारा बस्तर) अभियान के जरिए स्थानीय लोगों में गौरव की भावना जगाई और ट्रैवल बस्तर प्लेटफॉर्म बनाकर इको-टूरिज्म और होम-स्टे को बढ़ावा दिया। इससे बस्तर का पर्यटन वैश्विक नक्शे पर आया।

दरभामें पपीता और कॉफी की खेती:

परंपरागत खेती से हटकर उन्होंने दरभा जैसे क्षेत्रों की पथरीली जमीन पर पपीते और कॉफी की खेती को प्रमोट किया। आज बस्तर की कॉफी (Bastar Coffee) देश भर में अपनी पहचान बना रही है, जो उनके विजन का ही परिणाम है।

नरवाप्रोजेक्ट (Rainwater Harvesting):

बस्तर में जलस्तर सुधारने के लिए उन्होंने मनरेगा के तहत ‘रिज़ टू वैली’ (Ridge to Valley) कॉन्सेप्ट पर बड़े पैमाने पर जल संरक्षण के कार्य कराए, जिससे सिचाई क्षमता में वृद्धि हुई।

कोरोना और मलेरिया के खिलाफ जंग:

कोविड काल के दौरान उन्होंने मात्र 24 घंटे के भीतर मेडिकल कॉलेज में अलग डायलिसिस वार्ड तैयार करवाया था। साथ ही ‘मलेरिया मुक्त बस्तर’ अभियान को स्थानीय भाषाओं (हल्बी, गोंडी) में प्रचारित कर जन-जन तक पहुँचाया।

सीधी जन-संवाद शैली:

वे अक्सर साइकिल या पैदल ही गांवों में पहुंच जाते थे ताकि आदिवासियों की समस्याओं को बिना किसी प्रोटोकॉल के समझ सकें। उनके इसी आत्मीय अंदाज के कारण वे ‘जनता के कलेक्टर’ के रूप में लोकप्रिय हुए।

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