नई दिल्ली/रायपुर: देश की विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की आर्थिक सेहत में पिछले चार वर्षों में क्रांतिकारी सुधार देखने को मिला है। लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में विद्युत राज्य मंत्री श्रीपाद नाईक ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए नियमों के कारण डिस्कॉम की पुरानी बकाया राशि में भारी कमी आई है।
बकाया राशि में 97% से अधिक की कमी
केंद्र सरकार ने 3 जून, 2022 को विद्युत (विलम्ब भुगतान अधिभार एवं संबंधित मामले) नियम, 2022 (एलपीएस नियम) अधिसूचित किया था। इन नियमों के लागू होने के समय, 03 जून 2022 को उत्पादन और पारेषण कंपनियों का कुल पिछला बकाया 1,39,947 करोड़ रुपये था। कड़े नियमों और समान मासिक किस्तों (EMI) में भुगतान की व्यवस्था के कारण 27 मार्च, 2026 तक यह राशि घटकर मात्र 3,330 करोड़ रुपये रह गई है।
But छत्तीसगढ़: बकाया चुकाने में अग्रणी राज्यों में शामिल
छत्तीसगढ़ की स्थिति में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। आंकड़ों के अनुसार:
- 03 जून 2022 तक स्थिति: छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड पर कुल 4,162 करोड़ रुपये का पिछला बकाया था।
- वर्तमान स्थिति (27 मार्च 2026): 44 किस्तों (EMI) के सफल भुगतान के बाद, छत्तीसगढ़ का पिछला बकाया अब पूरी तरह समाप्त (शून्य) हो गया है।
- वर्तमान देयताएं: वर्तमान में छत्तीसगढ़ पर केवल 77 करोड़ रुपये की चालू बकाया राशि (Current Dues) है, जो नियमों के तहत निर्धारित समय-सीमा के भीतर है।
उदय (UDAY) योजना और बॉन्ड की स्थिति
सरकार ने स्पष्ट किया कि पिछले तीन वर्षों के दौरान किसी भी राज्य ने उज्ज्वल डिस्कॉम आश्वासन योजना (UDAY) के तहत कोई नया बॉन्ड जारी नहीं किया है। छत्तीसगढ़ ने योजना की शुरुआत में 870 करोड़ रुपये के बॉन्ड जारी किए थे, जबकि पूरे देश में इस योजना के तहत अब तक कुल 2,34,862 करोड़ रुपये के बॉन्ड जारी किए जा चुके हैं।
देरी के कारण और सुधारात्मक कदम
डिस्कॉम द्वारा भुगतान में देरी के मुख्य कारणों में सब्सिडी मिलने में विलंब, सरकारी विभागों का बकाया और बिजली आपूर्ति की लागत (ACS) एवं प्राप्त राजस्व (ARR) के बीच का अंतर शामिल है। इन समस्याओं से निपटने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं:
- संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS): देश भर में स्मार्ट मीटरिंग और नुकसान कम करने के लिए 2.83 लाख करोड़ रुपये के कार्य स्वीकृत किए गए हैं।
- वित्तीय अनुशासन: राज्य सरकारों को विशिष्ट सुधारों की शर्त पर उनके सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के 0.5% तक अतिरिक्त ऋण लेने की अनुमति दी गई है।
- कड़े नियम: समय पर भुगतान न करने पर बिजली खरीद में बाधा जैसे कड़े प्रावधान किए गए हैं, जिनसे बचने के लिए डिस्कॉम अब समय पर भुगतान कर रही हैं।
राष्ट्रीय सारांश (27 मार्च 2026 तक):
- कुल पुराना बकाया (शेष): 3,300 करोड़ रुपये।
- कुल वर्तमान बकाया: 13,594 करोड़ रुपये।
- कुल संचित बकाया: 16,894 करोड़ रुपये।
इस सुधार ने न केवल वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति मजबूत की है, बल्कि उत्पादन कंपनियों को भी समय पर भुगतान सुनिश्चित किया है, जिससे पूरे ऊर्जा क्षेत्र में स्थिरता आई है।
नवीन जिंदल ने पूछा सवाल
विद्युत वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की आर्थिक स्थिति को लेकर यह सवाल सांसद नवीन जिंदल ने पूछा था। इसका विद्युत राज्य मंत्री श्रीपाद नाईक ने लोकसभा में उत्तर दिया। उन्होंने बिजली कंपनियों की अर्थिक स्थिति में सुधार का दावा किया है।
पावर सेक्टर में ‘रिफॉर्म’ का असर
देश के सबसे बड़े बकायादार: कौन अब भी है कतार में?
हालांकि अधिकांश राज्यों ने अपने पिछले कर्ज को लगभग खत्म कर लिया है, लेकिन कुछ राज्यों और उनकी डिस्कॉम पर अब भी वर्तमान और पुरानी देनदारियों का बोझ बना हुआ है। 27 मार्च 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार, कुल बकाया (पुराना + वर्तमान) के मामले में ये प्रमुख नाम हैं:
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| राज्य / डिस्कॉम | पुराना बकाया (ईएमआई शेष) | वर्तमान बकाया (Current) | कुल बकाया (करोड़ ₹) |
|---|---|---|---|
| उत्तर प्रदेश (UPPCL) | 0 | 4,277 | 4,277 |
| महाराष्ट्र (MSEDCL) | 1,150 | 1,625 | 2,775 |
| कर्नाटक (सभी डिस्कॉम) | 755 | 2,190 | 2,945 |
| तमिलनाडु (TANGEDCO) | 1,395 | 152 | 1,547 |
| जम्मू एवं कश्मीर (JKPDD) | 0 | 886 | 886 |
| छत्तीसगढ़ (CSPDCL) | 0 | 77 | 77 |
ऐसे सुधरी स्थिति
बिजली कंपनियों के भुगतान में देरी के मुख्य कारण हमेशा से सब्सिडी मिलने में देरी और बिजली आपूर्ति की लागत (ACS) व राजस्व (ARR) के बीच का अंतर रहे हैं । इसे सुधारने के लिए सरकार ने त्रि-आयामी रणनीति अपनाई:
- LPS नियमों का डंडा: नियमों के तहत प्रावधान किया गया कि यदि डिस्कॉम समय पर भुगतान नहीं करती हैं, तो उन्हें नेशनल ग्रिड से बिजली मिलने में बाधा आएगी । इस ‘ट्रिगर’ के डर से डिस्कॉम अब समय पर भुगतान को प्राथमिकता दे रही हैं।
- RDSS योजना का सहारा: संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) के तहत ₹2.83 लाख करोड़ के कार्य स्वीकृत किए गए हैं । फंड जारी करने को ‘वित्तीय प्रदर्शन’ और ‘स्मार्ट मीटरिंग’ से जोड़ दिया गया, जिससे वित्तीय अनुशासन आया ।
- अतिरिक्त ऋण की सुविधा: जो राज्य बिजली क्षेत्र में सुधार लागू कर रहे हैं, उन्हें उनके सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के 0.5% तक अतिरिक्त ऋण लेने की अनुमति दी गई है, जिससे उन्हें नकदी के संकट से निपटने में मदद मिली ।

