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IPS छत्‍तीसगढ़ में दागी IPS अफसरों की पदोन्‍नति पर बवाल: SP ने CM साय को लिखा पत्र, कहा- छाबड़ा, अग्रवाल और पल्‍लव प्रमोट हो गए, मुझे…  

IPS छत्‍तीसगढ़ में दागी IPS अफसरों की पदोन्‍नति पर बवाल: SP ने CM साय को लिखा पत्र, कहा- छाबड़ा, अग्रवाल और पल्‍लव प्रमोट हो गए, मुझे...

IPS  रायपुर। छत्‍तीसगढ़ कैडर के आईपीएस अफसरों की हाल में प्रमोशन आर्डर जारी हुआ है। आदेश जारी होने के साथ ही इस पर सवाल खड़े किए जाने लागे हैं। इसमें कुछ ऐसे आईपीएस अफसरों को प्रमोट कर दिया गया है, जिनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण लंबित है।  

एसपी ने सीधे मुख्‍यमंत्री को लिखा पत्र

आईपीएस पदोन्‍नति पर सवाल भी एक आईपीएस ने ही खड़ा किया है। सवाल खड़ा करने वाले आईपीएस का नाम धर्मेंद्र सिंह छवई है। धर्मेंद्र सिंह इस वक्‍त डिप्‍टी सीएम और राज्‍य के गृह मंत्री विजय शर्मा के गृह जिला कबीरधाम में पदस्‍थ हैं।

अनुशंसा के बावजूद नहीं मिली पदोन्‍नति

मुख्‍यमंत्री को लिखे पत्र में आईपीएस धर्मेंद्र सिंह ने लिखा है कि मैं भारतीय पुलिस सेवा (2012 बैच) का अधिकारी हूं। वर्तमान में पुलिस अधीक्षक कबीरधाम के पद पर कार्यरत हूं। पुलिस मुख्यालय की तरफ से समय-समय पर मेरी पदोन्नति के संबंध में संनिष्ठता प्रमाणित करते हुए 10 अक्‍टूबर 2024, 31 दिसंबर 2024, 26 मई 2025 और 31 जुलाई 2025 के माध्यम से मेरी पदोन्नति की अनुशंसा की गई है, पदोन्‍नति नहीं दी गई।

इस वजह से धर्मेंद्र सिंह को नहीं मिली पदोन्‍नति

दरअसल, आईपीएस धर्मेंद्र सिंह के खिलाफ लोकायुक्त संगठन भोपाल में जांच विवेचना स्तर पर लंबित है। इसी कारण उन्‍हें प्रमोशन नहीं दिया गया है। इसी पर उन्‍होंने असंतोष जाहिर करते हुए मुख्‍यमंत्री को पत्र भेजा है।

इन आईपीएस अफसरों के खिलाफ जांच हैं लंबित

आईपीएस धर्मेंद्र सिंह ने हाल ही में पदोन्‍नति पाने वाले अफसरों के खिलाफ जांच चलने की भी जनकारी दी है। उन्‍होंने लिखा है कि डॉ. आनंद छाबडा  के विरूद्ध अपराध क्र.-06/24 (महादेव सट्टा ऐप) भ्र.नि.अधि. 1988 यथासंशोधित 2018 की धारा 17 (क) के अधीन प्रकरण विवेचना में है।

इसी तरह प्रशांत अग्रवाल  के विरूद्ध भी विवेचना स्तर पर अपराध क्रं-06/24 (महादेव सट्टा ऐप्प) भ्र.नि.अधि. 1988 यथासंशोधित 2018 की धारा 17 (क) के अधीन प्रकरण विवेचना में है। वहीं अभिषेक पल्लव  के भी अपराध कायम होकर विवेचनाधीन है।

वहीं, रजनेश सिंह पर अपराध क्रं-06/19 एवं 07/19 कायम है। जिसमें आज तक न्यायालय से कोई अंतिम रिपोर्ट स्वीकृत नही है, फिर भी उक्त अधिकारियों को पदोन्नत किया गया है जबकि मेरे विरूद्ध प्रकरण लंबित होने के आधार पर पदोन्ननति नहीं दी गई है, जो कि भारतीय संविधान के मौलिक अधिकारों के अंतर्गत अनुच्छेद-16 के तहत् अवसर की समानता का खुला उल्लंघन है।

आईपीएस ने दिया नियमों का हवाला

अपने पत्र में आईपीएस धर्मेंद्र सिंह ने नियमों का हवाला देते हुए लिखा है कि भारत सरकार गृह मंत्रालय द्वारा पदोन्नति हेतु जारी नियम दिनांक 15/01/1999 के कंडिका-11 के अनुसार 11 (A) के अनुसार निलंबन के दौरान 11 (B) के अनुसार अधिकारी के विरूद्ध आरोप पत्र जारी किया जा चुका हो और विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित हो।

11 (C) के अनुसार अधिकारी के विरूद्ध न्यायालय में आपराधिक प्रकरण लंबित हो।

नहीं किया जा सकता अपात्र

तीन बिंदुओं के आधार पर ही किसी भी भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी को पदोन्नति/प्रवर श्रेणी वेतनमान के लिए अपात्र किया जा सकता है। उन्‍होंने लिखा है कि इसके विपरीत मेरे प्रकरण में उक्त कंडिकाएं लागू नहीं है, फिर भी जान-बूझकर बदनियति  और पूर्वाग्रहों के चलते मुझे न तो वरिष्ठ वेतनमान दिया जा रहा है, और न ही उप पुलिस महानिरीक्षक के पद पर पदोन्नत किया गया है, जो कि मेरे मौलिक अधिकारों का स्पष्टतः हनन है। मेरे समान स्थिति वाले अधिकारियों को पदोन्नत किया गया है, जबकि मेरे साथ भेदभाव किया गया है।

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