IT Act रायपुर। एक अप्रैल से शुरू हो रहे नए वित्तीय वर्ष में आयकर नियमों में बदलाव होने वाला है। इसके तहत पैन कार्ड उपयोग, कैश लेन-देन, बच्चों की पढ़ाई पर टैक्स छूट, इन्वेस्टमेंट-लिंक्ड टैक्स और शेयर बाजार से जुड़े नियमों तक बदलावों की घोषणा बजट में भी की जा चुकी है। इनका उद्देश्य छोटे लेन-देन में आम लोगों को राहत देना और बड़े ट्रांज़ैक्शनों पर सरकारी निगरानी को और मजबूत करना है।
इंश्योरेंस सेक्टर में अब हर पालिसी की खरीद पर पैन देना अनिवार्य होगा। पालिसी की राशि चाहे कितनी भी हो। वहीं मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स पर मिलने वाला ब्याज अब टैक्स-फ्री रहेगा, इससे दुर्घटना पीडि़तों को पूरा मुआवजा मिलेगा और प्रशासनिक कामकाज भी आसान होगा।
कर विशेषज्ञों से मिली जानकारी के अनुसार नए वित्तीय वर्ष से बच्चों के एजुकेशन अलाउंस पर पहले सिर्फ 100 रुपये प्रति माह टैक्स छूट मिलती थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह प्रति बच्चा कर दिया गया है। हॉस्टल अलाउंस पर छूट पहले 300 रुपये थी, अब इसे बढ़ाकर 9000 रुपये प्रति माह प्रति बच्चा कर दिया गया है। इससे बच्चों की पढ़ाई और हॉस्टल खर्च पर आम परिवारों को बहुत राहत मिलेगी।
नए वित्तीय वर्ष से शेयर बाजार के नियमों में भी बहुत से बदलाव होने वाले है। इसके तहत शेयर बायबैक से मिलने वाली राशि अब कैपिटल गेन के रूप में टैक्स की जाएगी। फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर एसटीटी 0.05 प्रतिशत और ऑप्शंस प्रीमियम पर 0.15 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे ट्रेडिंग की लागत बढ़ जाएगी। बिना ऑडिट वाले व्यवसायों और प्रोफेशनल्स को रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख अब 31 अगस्त तक बढ़ा दी गई है। वहीं सामान्य सैलरीभोगी 31 जुलाई तक ही टैक्स रिटर्न दाखिल करेंगे।
कर विशेषज्ञों का कहना है कि नए वित्तीय वर्ष से छोटे वित्तीय लेन-देन में पैन कार्ड की झंझट कम हो जाएगी। बैंक या पोस्ट ऑफिस से पूरे साल में 10 लाख रुपये तक कैश जमा या निकालने पर पैन देना अनिवार्य नहीं होगा। होटल, रेस्टोरेंट या फंक्शन में 1 लाख रुपये तक के बिल पर पैन डिटेल्स देने की जरूरत नहीं होगी। नई कार या मोटरसाइकिल खरीदते समय 5 लाख रुपये तक की कीमत पर पैन जरूरी नहीं होगी। वहीं मकान या फ्लैट खरीदने पर अब 20 लाख रुपये तक की डील में पैन नहीं देना पड़ेगा।