
Jan Vishvas रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने मकान मालिकों, सभी तरह की सोसायटी और महिला समूहों के हक में काननू में बड़ा बदलाव किया है। विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार ने जनविश्वास विधेयक पारित किया है। पहले जिन मामलों में सजा और बड़ा जुर्माना लगता था, उसमें अब केवल जुर्माना का प्रवधान कर लिया गया है।
जानिए- क्या है जनविश्वास विधेयक
जनविश्वास विधेयक के जरिये छत्तीसगढ़ सरकार ने अंग्रेजों के समय से चले आ रहे कई ऐसे कानूनों को बदल दिया है जिसमें पहले बड़ी सजा या जुर्माना का प्रावधान था। सरकार ने इसे राज्य में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ लिविंग की दिशा बड़ा कदम बताया है।
Jan Vishvas अब बिना पूर्व सूचना के किराया बढ़ाने पर नहीं होगी सजा
जनविश्वास विधेयक के जरिये सरकार ने मकान मालिकों को बड़ी राहत दी है। पहले किराया बढ़ाने की सूचना नहीं देने पर आपराधिक केस दर्ज होता था, लेकिन जनविश्वास विधेयक लागू होने के बाद अब ऐसे मामलों में मकान मालिक पर केवल जुर्माना लगेगा। जुर्माना की राशि अधिकतम एक हजार रुपए होगी।
सोसाइटी को भी मिली राहत
जनविश्वास विधेयक के माध्यम से सोसायटी (समिति) को भी राहत देने दिया गया है। सोसायटीयों को हर साल अपना वार्षिक प्रतिवेदन जमा करना जरुरी है, ऐसा नहीं करने पर केस दर्ज हो जाता था। अब सरकार ने इसमें बदलाव कर दिया है। ऐसे मामलों में अब नाममात्र का जुर्माना लगेगा।
Jan Vishvas महिला समितियों को ज्यादा राहत
महिला सोसायटीटियों को जनविशवस विधेयक के जरिये ज्यादा राहत दी गई है। महिला समूहों की तरफ से वार्षिक प्रतिवेदन समय पर जमा नहीं करने की स्थिति में अब उन पर केस दर्ज नहीं होगा। इनके लिए जुर्माना की राशि भी एकदम कर दी गई है।
सहकारी शब्द के उपयोग पर भी नहीं होगा केस
जनविश्वास सहकारी शब्द के उपयोग पर होने वाली कार्यवाही में बदलाव कर दिया गया है। अब यदि कोई संस्था गलती से सहकारी शब्द का उपयोग कर लेती है तो उसके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं होगा। छत्तीसगढ़ सरकार ने ऐसे प्रकरणों में भी सजा को अर्थदंड तक सीमित कर दिया है।



