
Karmchari रायपुर। छत्तीसगढ़ में मोदी की गारंटी लागू कराने की मांग को लेकर प्रदेश के शासकीय सेवकों के हड़ताल का बुधवार को तीसरा और अंतिम दिन था। इस बीच सरकार की खामोशी ने प्रदेश के शासकीय सेवकों का गुस्सा बढ़ा दिया है। कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने सरकार की चुप्पी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। फेडरेशन ने अब अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी जारी कर दी है।
तीसरे दिन भी पूरे प्रदेश में कामकाज ठप
फेडरेशन के आंदोलन के तीसरे दिन भी इसका प्रदेश के शासकीय कार्यलयों और कामकाज पर व्यापक असर दिखा। नवा रायपुर स्थित इंद्रावती भवन से लेकर संभागीय और जिला मुख्यालयों तक ज्यादातर शासकीय कार्यालयों में कामकाज ठप रहा और बड़ी संख्या में कर्मचारी-अधिकारी आंदोलन में शामिल रहे। विश्वविद्यालयों, स्कूलों, निकायों, विभागीय कार्यालयों और निगम-मंडलों तक आंदोलन के समर्थन की स्पष्ट तस्वीर दिखाई दी।
प्रदेशभर में रैली और प्रदर्शन
हड़ताल के दौरान आज भी राज्य के विभिन्न जिलों में फेडरेशन के संयोजकों के नेतृत्व में रैलियां, धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी हुई। कर्मचारियों और शिक्षकों के सामूहिक अवकाश लेकर हड़ताल में शामिल होने कारण कई शासकीय सेवाएं प्रभावित रहीं।
अभूतपूर्व सफलता
फेडरेशन पदाधिकारियों ने बताया कि 29 से 31 दिसंबर तक घोषित कलम बंद-काम बंद आंदोलन को प्रदेश के सभी संभागों में अभूतपूर्व समर्थन मिला है और आंदोलन की जमीन अब पूरी तरह तैयार हो चुकी है। यदि सरकार द्वारा शीघ्र सार्थक संवाद प्रारंभ नहीं किया जाता, तो फेडरेशन अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा करने के लिए बाध्य होगा।
11 सूत्रीय मांगों को लेकर चल रहा है आंदोलन
फेडरेशन की प्रमुख 11 सूत्रीय मांगों में देय तिथि से महंगाई भत्ता एवं डीए एरियर्स, चार स्तरीय समयमान वेतनमान, विभिन्न संवर्गों की वेतन विसंगतियों का निराकरण, पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करना, शिक्षकों की सेवा गणना प्रथम नियुक्ति तिथि से मानना, कैशलेस चिकित्सा सुविधा, अनुकंपा नियुक्ति नियमों में शिथिलीकरण, पंचायत सचिवों का शासकीयकरण, संविदा-दैनिक कर्मचारियों का नियमितीकरण और सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष किए जाने जैसी मांगें शामिल हैं।
कर्मचारी नेताओं ने दी चेतावनी
प्रांतीय संयोजक कमल वर्मा,प्रांतीय प्रवक्ता चंद्रशेखर तिवारी, जीआर चंद्रा, बीपी शर्मा,रोहित तिवारी,संजय सिंह,अरुण तिवारी,संजय ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के कर्मचारियों का मनोबल ऊंचा है और आंदोलन को जनसमर्थन प्राप्त हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि— ‘फेडरेशन संवाद और समाधान चाहता है, लेकिन यदि सरकार चुप्पी साधे रहती है, तो कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा। ‘फेडरेशन ने सरकार से शीघ्र वार्ता प्रारंभ कर सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की है, अन्यथा आंदोलन को अगले चरण में ले जाने की चेतावनी दी है।




