Kaushalya Dham बालोद। छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश और दुनिया में सनातन संस्कृति व आस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित बालोद जिले के डौण्डीलोहारा विकासखंड के सुदूर वनांचल में स्थित पाटेश्वर आश्रम में भव्य और विशाल कौशल्या धाम बनाने का परिकल्पना शीघ्र साकार होने वाला है।
पाटेश्वर सेवा संस्थान के संचालक राम बालकदास महात्यागी ने बताया कि कौशल्या धाम का निर्माण कार्य अंतिम चरण पर है। उन्होंने कहा कि माता कौशल्या धाम के निर्माण कार्य पूरा हो जाने के बाद 2026 में इसका विधिवत लोकार्पण किया जाएगा।
संत राम बालकदास ने बताया कि समाज के सभी वर्गों के सहयोग से निर्मित की जा रही भव्य और विशाल कौशल्या माता धाम पूरे देश और दुनिया का एक मात्र कौशल्या धाम होगा। उन्होंने कहा कि पाटेश्वर आश्रम परिसर के लगभग 04 एकड़ भूमि में निर्माणाधीन तीन मंजिला कौशल्या धाम मंदिर के दूसरे तल पर भगवान श्री रामलला को अपनी गोद में ली हुई 07 फीट का मां कौशल्या की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा पूरे देश और दुनिया में अपने तरह की पहली प्रतिमा होगी।
कौशल्या धाम के पहले तल में शिव लिंग स्थापित की जाएगी। इसके साथ ही तीसरे तल पर पंचमुंखी हनुमान की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। संत राम बालकदास ने बताया कि तीनों प्रतिमा के निर्माण कार्य अंतिम चरण पर है।
इसके अलावा इस भव्य और विशाल तीन मंजिला कौशल्या धाम में अग्नि, वायु, सहस्त्रबाहु, कबीर, संत रविदास, झुलेलाल, कर्मा माता, परमेश्वरी माता समेत सभी जाति और सम्प्रदाय के 108 आराध्य देवी- देवताओं और महापुरूषों की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
यह स्थल प्रारंभ से ही आदिवासी समाज तथा अंचल के लोगों के लिए आस्था का केंद्र रहा है। इस आश्रम परिसर के ऊपरी पहाड़ी पर 12 गांव व आदिवासी समाज के लोगों का आराध्य देव स्थापित हैं। वहां तक पहुंचने के लिए में 416 सीढ़ी यहां पर विभिन्न पर्वों के अवसर पर आदिवासी समाज और अंचल के लोगों के द्वारा पूजा-अर्चना किया जाता है।
पाटेश्वर धाम सेवा संस्थान के संचालक संत राम बालकदास ने बताया कि उनके गुरू देव राज योगी बाबा जी सन् 1975 में पाटेश्वर धाम आगमन के बाद पेड़ के नीचे अखंड धुनि जलाई थी।
इस स्थान पर अनवरत रूप से अखंड धुनि प्रज्ज्वलित हो रही है। इसके अलावा पाटेश्वर धाम के मंदिर परिसर में 1977 से दक्षिण मुंखी हनुमान की प्रतिमा स्थापित की गई है। पाटेश्वर धाम परिसर में पानी का कुंड स्थापित है, इस कुंड का पानी कभी सूखता नही है।
धाम में श्रद्धालुओं, दर्शानार्थियों और आगन्तुकों के लिए नि:शुल्क भोजन की भी व्यवस्था है, वहां चलने वाली रसोई को सीता रसोई नाम दिया गया है। संत राम बालकदास ने बताया कि 2015 में जगत गुरू राजेन्द्र देवाचार्य और चारों जगत गुरूओं की उपस्थिति में आयोजित कथा वाचन के दौरान पाटेश्वर धाम परिसर में मां कौशल्या धाम स्थापित करने का सुझाव दिया गया था।
भगवान श्री रामचंद्र जी का ननिहाल और माता कौशल्या का मायका छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में देश और दुनिया का एक मात्र कौशल्या धाम का निर्माण करने का परिकल्पना जल्द ही साकार होने वाला है।
यहां पर नन्हें बालक भगवान श्री रामलला को अपने गोद में ली हुई माता कौशल्या की सात फीट ऊंची प्रतिमा को कौशल्या धाम में स्थापित किया जाएगा।
माता कौशल्या की इस प्रतिमा का निर्माण राजस्थान के लाल पत्थरों से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस भव्य एवं विशाल मंदिर के निर्माण में समाज के सभी वर्ग के लोगों ने अपना सहयोग दिया है।
यह कौशल्या धाम जन सहयोग से बनने वाला अपने आप में अनुपम और अद्वितीय होगा और बालोद जिला का यह स्थाना माता कौशल्या धाम के नाम से विश्व में विख्यात होगा।