Korba News: कोरबा : छत्तीसगढ़ के औद्योगिक शहर कोरबा से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी (CGSPGCL) का कोरबा पूर्व स्थित वीआईपी विश्राम गृह (VIP Rest House) इन दिनों विवादों के घेरे में है। आरोप है कि सरकारी खर्च पर चलने वाला यह गेस्ट हाउस अब बड़े अफसरों की शराबखोरी का मुख्य केंद्र (Hub) बन चुका है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ वीडियो और तस्वीरों ने विभाग में हड़कंप (Chaos) मचा दिया है। इन वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जिस जगह पर वीआईपी मेहमानों के रुकने की व्यवस्था होनी चाहिए, वहां जाम छलकाए जा रहे हैं।
फ्रीजर में रखी थी शराब, वीडियो में दिखे बड़े अफसर
वायरल वीडियो छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी के DSPM संयंत्र (DSPM Plant) के बताए जा रहे हैं। इसमें कंपनी के कुछ उच्च अधिकारियों को कथित तौर पर शराबखोरी करते हुए देखा जा सकता है।
तस्वीरों में दिख रहे व्यक्ति के संबंध में दावा किया जा रहा है कि वे कंपनी के केमिस्ट और उनके साथ कुछ अन्य लोग स्पष्ट रूप से नजर आ रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात (Shocking Fact) यह है कि विश्राम गृह के किचन में रखे फ्रीजर में सब्जी या दूध की जगह शराब की दर्जनों बोतलें ठसाठस भरी हुई दिखाई दे रही हैं।
खबर के मुख्य अंश (Key Points):
- खुलेआम शराबखोरी: रेस्ट हाउस के कमरों में अधिकारी शराब पीते कैमरे में कैद हुए।
- किचन का वीडियो: एक युवक किचन से शराब की बोतल और गिलास लेकर वीआईपी कमरे की ओर जाते दिख रहा है।
- भंडारण का आरोप: बताया जा रहा है कि यहां केवल अफसरों के लिए ही नहीं, बल्कि ठहरने वाले अन्य प्रभावशाली लोगों के लिए भी शराब का स्टॉक (Stock) रखा जाता है।
लंबे समय से चल रहा था खेल (Investigation Needed)
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह शराबखोरी का सिलसिला (Process) काफी लंबे समय से चल रहा था। विश्राम गृह के नियमों को ताक पर रखकर सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग किया जा रहा है।
परिणामस्वरूप (Consequently), अब यह मामला सार्वजनिक होने के बाद प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या सरकारी विश्राम गृहों को अधिकारियों की निजी पार्टियों के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है?
प्रबंधन की चुप्पी और कार्रवाई का इंतजार
वीडियो वायरल होने के बाद अब सबकी नजरें छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी के प्रबंधन (Management) पर टिकी हैं। अभी तक इस मामले में किसी भी अधिकारी के खिलाफ आधिकारिक कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।
हालाँकि (However), चतुरपोस्ट की टीम इस संबंध में प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए लगातार संपर्क (Contact) करने की कोशिश कर रही है। विभाग के भीतर चल रही इस गुटबाजी या लापरवाही का खुलासा होने के बाद अब कड़े एक्शन की मांग उठ रही है।

