
KVK रायपुर। छत्तीसगढ़ कृषि विज्ञान केंद्र ( KVK) के अधिकारी/कर्मचारियों की वेतन विसंगति, अपूर्ण वेतन भुगतान और वैधानिक सेवा-लाभों की बहाली को लेकर चल रहा आंदोलन अब निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है।
छत्तीसगढ़ कृषि विज्ञान केंद्र सर्व कर्मचारी कल्याण संघ ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलसचिव को विधिवत पत्र प्रेषित कर यह स्पष्ट कर दिया गया है कि 16 से 20 फरवरी 2026 तक चली घोषित पांच दिवसीय कामबंद हड़ताल समाधान के अभाव में 23 फरवरी 2026 से अनिश्चितकालीन कामबंद हड़ताल सह धरना-प्रदर्शन में परिवर्तित की जा रही है।
वार्ता रही निष्कर्षहीन, जिम्मेदारी से बचता रहा प्रशासनः
स्थायी, स्पष्ट संघ ने बताया कि हड़ताल अवधि के दौरान प्रतिनिधिमंडल द्वारा विश्वविद्यालय प्रशासन से एवं समयबद्ध समाधान की अपेक्षा के साथ चर्चा की गई, किंतु माननीय कुलपति महोदय द्वारा KVK की लंबित एवं गंभीर समस्याओं के निराकरण के संबंध में जिम्मेदारी से बचने वाला रुख अपनाया गया कभी विषय को माननीय राज्यपाल, छत्तीसगढ़ के स्तर से जोड़कर चर्चा टाली गई, तो कभी वित्त विभाग एवं राज्य शासन का हवाला देकर वार्ता को उलझाया गया जिसके परिणामस्वरूप कोई भी स्पष्ट, लिखित एवं क्रियान्वयन योग्य निर्णय सामने नहीं आ सका।

विश्वविद्यालय की भ्रामक प्रेस विज्ञप्ति पर संघ का कड़ा विरोध
संघ ने विश्वविद्यालय द्वारा प्रसारित प्रेस विज्ञप्ति में निहित गंभीर एवं आपत्तिजनक तथ्यों की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि
1. ICAR के स्थगित (Abeyance) पत्र का भ्रामक हवालाः यह अत्यंत खेदजनक है कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा 20.08.2024 के पत्र को अबेयेंस (स्थगित) किए जाने के पश्चात भी उसी पत्र का हवाला देकर शासन-प्रशासन एवं जनसामान्य को भ्रमित किया जा रहा है। स्थगित पत्र के आधार पर तर्क प्रस्तुत करना तथ्यों की अवहेलना एवं जानबूझकर किया गया भ्रामक प्रयास है।
2. ICAR के 75% अंशदान को 100% बताकर वैधानिक दायित्व से बचने का प्रयास: ICAR के स्पष्ट निर्देशों के अनुसार परिषद द्वारा केवल Pay + DA + HRA की 75% राशि दी जाती है। शेष 25% वित्तीय दायित्व जिसमें नियोक्ता NPS/पेंशन अंशदान, चिकित्सा भत्ता, ग्रेच्युटी, अर्जित अवकाश नगदीकरण एवं सेवानिवृत्ति उपरांत देय लाभ सम्मिलित हैं का वहन मेजबान संस्था अर्थात इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा किया जाना अनिवार्य है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय द्वारा ICAR के 75% अंशदान को 100% बताकर अपने वैधानिक 25% दायित्व से बचने का प्रयास किया जाना असत्य एवं भ्रामक है।
उच्च न्यायालय के आदेश एवं स्वयं के आदेश की अवहेलनाः
3. छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 24.06.2025 को पारित स्थगन आदेश के अनुपालन में विश्वविद्यालय द्वारा स्वयं पत्र क्रमांक 1520, दिनांक 07.08.2025 जारी कर पूर्ववत वेतन एवं भत्तों के भुगतान के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद उक्त आदेश का पालन न किया जाना न्यायालयीन आदेश की अवहेलना तथा प्रशासनिक शक्ति के दुरुपयोग के समतुल्य है।
दायित्व स्पष्ट- मेजबान संस्था ही जिम्मेदारः
संघ ने दोहराया कि KVK के समस्त अधिकारी एवं कर्मचारी सेवा शर्तों की दृष्टि से मेजबान संस्था (इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय) के कर्मचारी हैं, और उनके वेतन, भत्ते एवं सेवा-लाभों की पूर्ण जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की है।
नियुक्ति आदेश मे स्पष्ट प्रावधानः
संघ ने यह भी स्पष्ट किया कि KVK के अधिकारी एवं कर्मचारी की नियुक्ति आदेशानुसार उनकी सेवा शर्तें पूर्णतः इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के नियमों एवं विनियमों द्वारा शासित हैं। साथ ही, नियुक्त कार्मिकों पर छत्तीसगढ़ राज्य शासन द्वारा 01.11.2004 से लागू नई अंशदायी पेंशन योजना (NPS), जिसे विश्वविद्यालय द्वारा भी अंगीकृत किया गया है, पूर्ण रूप से लागू होती है। अतः सेवा-लाभों एवं नियोक्ता अंशदान संबंधी समस्त दायित्वों से विश्वविद्यालय का विमुख होना नियुक्ति आदेश एवं सेवा नियमों के प्रतिकूल है।
संघ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन तत्काल, स्पष्ट एवं लिखित निर्णय लेकर KVK कर्मचारियों के पूर्ण वेतन एवं समस्त वैधानिक सेवा-लाभ बहाल नहीं किए गए तो-अनिश्चितकालीन हड़ताल के दौरान उत्पन्न होने वाली समस्त प्रशासनिक शैक्षणिक एवं प्रसारगत अव्यवस्थाओं की पूर्ण जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।
संघ ने पुनः स्पष्ट किया कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक एवं अनुशासित है, किंतु कर्मचारियों के सम्मान, आजीविका एवं वैधानिक अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।




