कर्मचारी हलचल

KVK कृषि विज्ञान केंद्रों की हड़ताल किसानों व कृषि व्यवस्था के लिए घातक: कुलपति से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग

KVK रायपुर। National Forum of KVK & AICRP के अध्यक्ष डॉ. मनोज शर्मा ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा है कि विश्वविद्यालय के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) विगत पांच दिनों से अपनी जायज़ मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं, जिसका सीधा और गंभीर प्रभाव किसानों की सेवाओं एवं कृषि विस्तार कार्यों पर पड़ रहा है।

डॉ. शर्मा ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्रों के अधिकारी एवं कर्मचारी विश्वविद्यालय द्वारा ही नियुक्त किए गए हैं। उनकी नियुक्ति के समय जारी नियुक्ति पत्र विश्वविद्यालय के अधिनियम (Act) एवं परिनियम (Statute) के अंतर्गत समस्त वेतन, भत्ते एवं सेवा-लाभ प्रदान करने का स्पष्ट आश्वासन देता है। इसके बावजूद वास्तविकता यह है कि आज उन्हें पूर्ण वेतन और वैधानिक भत्ते नहीं दिए जा रहे हैं।

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उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा कृषि विज्ञान केंद्रों हेतु दी जाने वाली राशि Grant-in-Aid के रूप में होती है, जो वर्तमान में केवल Basic Pay एवं HRA तक सीमित कर दी गई है। विश्वविद्यालय इस अनुदान को यथावत KVK कर्मचारियों को आबंटित कर देता है, जिसके परिणामस्वरूप अन्य वैधानिक भत्ते एवं सुविधाएं कर्मचारियों को नहीं मिल पा रहीं।

डॉ. शर्मा ने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अधीन आने वाले कृषि विज्ञान केंद्रों के कर्मचारियों को पिछले लगभग 18 महीनों से भारी आर्थिक एवं मानसिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वेतन और भत्तों की अनियमितता के कारण कर्मचारियों के पारिवारिक जीवन, बच्चों की शिक्षा और सामाजिक दायित्वों पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इन्हीं परिस्थितियों से विवश होकर कर्मचारियों ने पाँच दिवसीय कामबंद हड़ताल का मार्ग अपनाया और अपना मांग-पत्र कुलपति महोदय को सौंपा।

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उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि KVK के अधिकारी एवं कर्मचारी विश्वविद्यालय की अमानत हैं, ICAR की नहीं। ICAR द्वारा बजट दिया जाना या न दिया जाना विश्वविद्यालय की वैधानिक जिम्मेदारी को समाप्त नहीं करता। विश्वविद्यालय के अंदर Research और Teaching से जुड़े वैज्ञानिकों एवं कर्मचारियों को जो भी सुविधाएं, भत्ते और सेवा-लाभ प्रदान किए जा रहे हैं, वही समान रूप से कृषि विज्ञान केंद्रों में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों को भी दिए जाने चाहिए।

डॉ. शर्मा ने  कुलपति से संवेदनशील, त्वरित और निर्णायक हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा कि कर्मचारियों की मांगें पूर्णतः न्यायसंगत, वैधानिक और मानवीय हैं। यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान किसानों, कृषि विस्तार सेवाओं और राज्य की कृषि व्यवस्था को होगा।

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अंत में उन्होंने National Forum of KVK & AICRP की ओर से यह आग्रह किया कि कुलपति महोदय अपने पद और दायित्व के अनुरूप तत्काल निर्णय लेते हुए KVK कर्मचारियों के समस्त बकाया वेतन, भत्ते एवं सेवा-लाभ बहाल करें, ताकि हड़ताल समाप्त हो और किसान पुनः निर्बाध सेवाएं प्राप्त कर सकें।

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